
नई दिल्ली। रक्षा मंत्रालय ने रक्षा खरीद नीति में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर ली है। ड्राफ्ट डिफेंस एक्विजिशन प्रोसीजर (DAP) 2026 के अनुसार, अब भारत की आत्मनिर्भरता केवल “मेड इन इंडिया” तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसके हथियार, टैंक, फाइटर जेट, ड्रोन और मिसाइलें पूर्ण स्वदेशी स्वामित्व के साथ होंगी। इसका मतलब यह है कि भारत इन सभी प्रणालियों पर संप्रभु नियंत्रण रखेगा और जब चाहे इन्हें अपनी जरूरत के हिसाब से अपग्रेड कर सकेगा।
ड्राफ्ट DAP 2026 में मुख्य बदलाव
रक्षा मंत्रालय ने स्टेकहोल्डर्स से 3 मार्च 2026 तक राय मांगी है। नई नीति के अनुसार, विदेशी सहयोग से तैयार होने वाले किसी भी रक्षा उत्पाद की इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी, सोर्स कोड और डिजाइन डेटा पर भारत का पूर्ण अधिकार होगा। अब देश केवल उत्पादन और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे सिस्टम के स्वामित्व में होगा।
स्वदेशी स्वामित्व का मतलब
चाहे कोई फाइटर जेट हो, युद्धपोत हो या मॉडर्न ड्रोन, सभी पर भारत का नियंत्रण होगा। देश इन हथियारों और प्रणालियों में बदलाव या अपग्रेड अपनी जरूरत के अनुसार स्वतंत्र रूप से कर सकेगा। इससे भारत की रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की वास्तविक परिभाषा स्थापित होगी।
नई सोच: स्वदेशीकरण से सैद्धांतिक प्रस्थान तक
ड्राफ्ट DAP 2026 में इसे ‘स्वदेशीकरण के शुरुआती चरण’ से ‘सैद्धांतिक प्रस्थान’ कहा गया है। इसका उद्देश्य भारत को केवल निर्माण केंद्र नहीं, बल्कि डिजाइन का पावरहाउस बनाना है, जिससे किसी विदेशी प्रणाली के विरासत के बंधनों से मुक्ति मिले।
अगले दशक का लक्ष्य: JAI (जय)
नई नीति अगले दशक को भारत के रक्षा इतिहास का सबसे निर्णायक दशक बनाने का लक्ष्य रखती है। इसके तहत तीन प्रमुख स्तंभ होंगे:
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Jointness (संयुक्तता)
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Atmanirbharta (आत्मनिर्भरता)
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Innovation (नई खोज)
जैसे ही ड्राफ्ट DAP 2026 को मंजूरी मिलेगी, भारत की रक्षा खरीद की पूरी नीति ही बदल जाएगी और देश अगले दशक में अपने स्वदेशी हथियारों और प्रणालियों के साथ वैश्विक मंच पर मजबूती से खड़ा होगा।
