
नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुई ट्रेड डील में पिछले एक सप्ताह में कई महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले हैं। सबसे ताजा बदलाव दाल को लेकर है, जिसे अमेरिकी फूड एंड एग्रीकल्चरल प्रोडक्ट्स की सूची से हटा दिया गया है। इसके अलावा, दोनों देशों की फैक्ट शीट में यह स्पष्ट किया गया है कि भारत अमेरिका से 500 अरब डॉलर से अधिक का ऊर्जा, सूचना-प्रौद्योगिकी, कोयला और अन्य उत्पाद खरीदेगा।
आइए जानते हैं पिछले 10 दिनों में हुए पांच बड़े बदलाव:
1. टैरिफ में अमेरिका ने दी राहत
7 फरवरी से लागू नए नियमों के तहत अमेरिका ने भारतीय सामानों पर लगाए गए अतिरिक्त पेनल्टी टैरिफ को खत्म कर दिया। अब प्रभावी टैरिफ 18% रह गया है, जिससे भारतीय निर्यातकों को वियतनाम और मैक्सिको जैसे देशों के मुकाबले बेहतर बाजार बढ़त मिलने की उम्मीद है।
2. रूसी तेल से दूरी और नया ऊर्जा करार
ट्रंप प्रशासन के अनुसार, भारत ने रूस से तेल आयात को घटाने या बंद करने पर सहमति दी है। पहले यह 1.7 मिलियन बैरल प्रतिदिन था, अब इसे 5-6 लाख बैरल तक सीमित किया जाएगा। इसके स्थान पर भारत अमेरिका और वेनेजुएला से तेल खरीदेगा। इसके साथ ही अमेरिका ने भारत के रत्न, आभूषण और जेनेरिक दवाओं के लिए अपने बाजार के दरवाजे खोल दिए, जिससे फार्मा और ज्वेलरी सेक्टर को बड़ी राहत मिली।
3. 500 बिलियन डॉलर की खरीद का करार
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुए समझौते में भारत ने अमेरिका से 500 बिलियन डॉलर (लगभग 41 लाख करोड़ रुपये) के सामान खरीदने का इरादा जताया। इसमें हाईटेक उपकरण, डेटा सेंटर, एयरलाइन कंपनियों के लिए बोइंग विमान और उनके पुर्जे, कोकिंग कोल और LNG शामिल हैं। डिजिटल सर्विस टैक्स को धीरे-धीरे हटाने के संकेत भी दिए गए हैं।
4. कृषि और संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा
भारत ने अपने किसानों की सुरक्षा का ध्यान रखा। ‘नेगेटिव लिस्ट’ के तहत डेयरी, मांस, गेहूं, चावल, मक्का और बाजरा जैसे उत्पादों पर कोई टैक्स छूट नहीं दी जाएगी। इसके अलावा जेनेटिकली मॉडिफाइड मक्का और सोयाबीन को अनुमति नहीं दी जाएगी, जिससे अमेरिकी कंपनियों की भारतीय बाजार में पहुंच सीमित होगी।
5. रणनीतिक और सुरक्षा मोर्चे पर बदलाव
डील केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि चीन के खिलाफ रणनीतिक साझेदारी भी शामिल है। शांति एक्ट, 2025 के तहत, अमेरिका भारत को नागरिक परमाणु ऊर्जा और रक्षा निर्माण में प्राथमिकता देगा, जिससे भारत में अमेरिकी निवेश तेजी से बढ़ेगा।
