Wednesday, March 4

तमिलनाडु में फिर साथ आए AIADMK-BJP, 30 साल की दोस्ती इस बार जीत में बदलेगी या फिर टूटेगी उम्मीद?

चेन्नै। तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। राज्य में सत्तारूढ़ डीएमके-कांग्रेस गठबंधन को सत्ता से हटाने के उद्देश्य से भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने पुराने सहयोगी अन्नाद्रमुक (AIADMK) के साथ फिर से हाथ मिला लिया है। यह गठबंधन 2026 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए बेहद अहम माना जा रहा है।

This slideshow requires JavaScript.

हालांकि, AIADMK और BJP की यह दोस्ती कोई नई नहीं है। पिछले तीन दशकों में यह रिश्ता कई बार जुड़ा और टूटा, लेकिन हर बार चुनावी मजबूरी और राजनीतिक गणित ने दोनों को एक मंच पर ला खड़ा किया। अब सवाल यह है कि क्या इस बार यह गठबंधन तमिलनाडु में जीत का स्वाद चख पाएगा, या फिर इतिहास खुद को दोहराएगा?

डीएमके को हराने की रणनीति, बीजेपी बना रही मजबूत मोर्चा

बीजेपी तमिलनाडु में डीएमके को सत्ता से हटाने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह लगातार राज्य का दौरा कर रहे हैं और डीएमके सरकार पर भ्रष्टाचार, अपराध, परिवारवाद और विकास रोकने जैसे आरोप लगाकर आक्रामक प्रचार कर रहे हैं।

बीजेपी की कोशिश है कि AIADMK के साथ-साथ छोटे क्षेत्रीय दलों को जोड़कर एक बड़ा गठबंधन तैयार किया जाए, जिससे स्टालिन सरकार को कड़ी चुनौती दी जा सके।

1999 से शुरू हुई थी दोस्ती, उतार-चढ़ाव से भरा रहा सफर

AIADMK और BJP के रिश्तों की शुरुआत राजनीतिक जरूरतों से हुई थी।

  • 1998 के लोकसभा चुनाव में AIADMK के समर्थन से ही अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने।

  • लेकिन 1999 में जयललिता ने समर्थन वापस ले लिया, जिससे वाजपेयी सरकार एक वोट से गिर गई।

  • इसके बाद मध्यावधि चुनाव हुए और राजनीतिक समीकरण बदलते रहे।

विशेषज्ञ मानते हैं कि AIADMK और BJP का रिश्ता विचारधारा से ज्यादा सत्ता और रणनीति पर आधारित रहा है।

जयललिता के बाद बिखरी AIADMK, BJP बनी सहारा

जयललिता के निधन के बाद AIADMK गुटबाजी में फंस गई। शशिकला परिवार, ओ पन्नीरसेल्वम और ई. पलानीस्वामी (EPS) के बीच नेतृत्व को लेकर संघर्ष चला।

इसी दौर में AIADMK ने केंद्र की मोदी सरकार को नीति-आधारित समर्थन देना शुरू किया और धीरे-धीरे यह रिश्ता गठबंधन में बदल गया।

हार पर हार, फिर भी साथ आने की मजबूरी

AIADMK-BJP गठबंधन को बीते वर्षों में चुनावी स्तर पर बड़ी सफलता नहीं मिली।

  • 2019 लोकसभा चुनाव में गठबंधन को करारी हार मिली और 40 में से 39 सीटें गंवानी पड़ीं।

  • 2021 विधानसभा चुनाव में भी गठबंधन हार गया, हालांकि AIADMK को 66 और BJP को 4 सीटें मिलीं।

  • 2024 के लोकसभा चुनाव में दोनों दल अलग-अलग लड़े।

लेकिन 2026 के चुनाव नजदीक आते ही दोनों पार्टियां फिर से बातचीत की मेज पर लौटीं और गठबंधन का ऐलान कर दिया।

AIADMK की शर्त पर बदला BJP का प्रदेश नेतृत्व

गठबंधन की सबसे अहम शर्त AIADMK की ओर से यह थी कि प्रदेश BJP अध्यक्ष के. अन्नामलाई को हटाया जाए।
बीजेपी ने इस मांग को स्वीकार करते हुए नैनार नागेंद्रन को तमिलनाडु भाजपा की कमान सौंप दी।

इस बदलाव को AIADMK को साधने की रणनीति माना जा रहा है। हालांकि राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि अन्नामलाई इससे नाराज भी हो सकते हैं।

2026 चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबला, अभिनेता विजय भी बने चुनौती

इस बार तमिलनाडु की राजनीति में मुकाबला सिर्फ दो ध्रुवों का नहीं रह गया है। अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके (TVK) भी मैदान में उतर चुकी है।

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, टीवीके किसके वोट बैंक में सेंध लगाएगी, यही 2026 के चुनाव का सबसे बड़ा निर्णायक कारक हो सकता है।

क्या इस बार बदलेगा इतिहास?

AIADMK-BJP गठबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि तमिलनाडु में लंबे समय से डीएमके और AIADMK के बीच ही सत्ता का खेल चलता रहा है। बीजेपी अब तक राज्य में अकेले दम पर बड़ा जनाधार नहीं बना पाई है।

लेकिन भाजपा को उम्मीद है कि AIADMK की मजबूत पकड़, केंद्र सरकार की योजनाएं और मोदी-शाह की चुनावी रणनीति इस बार परिणाम बदल सकती है।

निष्कर्ष

तमिलनाडु में AIADMK और BJP की दोस्ती एक बार फिर चुनावी रणभूमि में उतर चुकी है। इतिहास गवाह है कि यह रिश्ता कई बार टूट चुका है, लेकिन इस बार दोनों दलों को सत्ता की उम्मीदें कहीं ज्यादा हैं। अब देखना यह है कि क्या यह गठबंधन डीएमके को सत्ता से बाहर कर पाएगा या फिर तमिलनाडु में स्टालिन सरकार दोबारा वापसी करेगी।

Leave a Reply