
सीकर। राजस्थान के शिक्षा विभाग को शर्मसार करने वाला मामला सीकर जिले से सामने आया है। यहां एक सरकारी बालिका विद्यालय में तैनात हेडमास्टर पर कक्षा सात की छात्रा के साथ अनुचित व्यवहार और छेड़छाड़ करने का गंभीर आरोप लगा है। छात्रा की शिकायत के बाद शिक्षा विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपी हेडमास्टर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
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इस घटना के सामने आने के बाद पूरे क्षेत्र में आक्रोश फैल गया है और स्कूलों में छात्राओं की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
छठे पीरियड में हुई कथित घटना, छात्रा डरकर स्कूल नहीं गई
पीड़िता छात्रा के अनुसार, 4 फरवरी को स्कूल के छठे पीरियड के दौरान हेडमास्टर ने उसके साथ आपत्तिजनक व्यवहार किया। आरोप है कि आरोपी ने छात्रा के सिर और गाल को पकड़कर गलत तरीके से छूने की कोशिश की और अनुचित हरकत की।
इस घटना से छात्रा बुरी तरह भयभीत हो गई और अगले दिन यानी 5 फरवरी को स्कूल नहीं गई। बाद में छात्रा ने साहस जुटाकर विद्यालय प्रशासन को लिखित शिकायत सौंपी।
शिकायत मिलते ही जांच समिति गठित
मामले की जानकारी मिलते ही विद्यालय की प्रधानाचार्य ने तुरंत इसकी सूचना संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी (CBEO) को दी। इसके बाद शिक्षा विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया, जिसने पूरे मामले की जांच शुरू की।
अन्य छात्राओं ने भी लगाए गंभीर आरोप
जांच के दौरान समिति ने स्कूल की अन्य छात्राओं के बयान भी दर्ज किए। कुछ छात्राओं ने भी हेडमास्टर पर स्कूल परिसर में अनुचित संकेत और गलत व्यवहार करने जैसे आरोप लगाए।
इन बयानों को जांच समिति की रिपोर्ट में शामिल किया गया, जिससे मामला और भी गंभीर हो गया।
जांच रिपोर्ट मिलते ही विभाग ने उठाया सख्त कदम
जांच समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद शिक्षा विभाग ने इसे गंभीर मानते हुए आरोपी हेडमास्टर को तत्काल निलंबित कर दिया। विभागीय सूत्रों के अनुसार, जांच पूरी होने के बाद आरोपी के खिलाफ आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जाएगी।
शिक्षा विभाग का बयान—“शून्य सहनशीलता की नीति”
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि स्कूलों में छात्राओं की सुरक्षा और सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता है। ऐसे मामलों में शून्य सहनशीलता की नीति अपनाई जाएगी और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई होगी।
विभाग ने अभिभावकों और छात्रों से अपील की है कि किसी भी प्रकार की अनुचित गतिविधि की जानकारी तुरंत स्कूल प्रशासन या संबंधित अधिकारियों को दें।
सवालों के घेरे में स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रशासनिक निगरानी और संवेदनशीलता की सख्त जरूरत है। अब पूरे मामले पर सभी की नजरें शिक्षा विभाग की अंतिम जांच रिपोर्ट और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।