Saturday, February 7

चीन के गुप्त हथियार ‘TPG1000Cs’ का खुलासा, स्टारलिंक सैटेलाइट नेटवर्क पर मंडराया बड़ा खतरा

बीजिंग। चीन के हाई-पावर माइक्रोवेव (HPM) हथियार कार्यक्रम को लेकर एक बड़ा खुलासा सामने आया है। चीनी वैज्ञानिकों द्वारा विकसित TPG1000Cs नामक यह गुप्त हथियार अब अमेरिका और पश्चिमी देशों के लिए गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक यह हथियार विशेष रूप से लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) में मौजूद सैटेलाइट नेटवर्क को निशाना बनाने में सक्षम है, जिसमें एलन मस्क की कंपनी SpaceX के स्टारलिंक सैटेलाइट्स भी शामिल हैं।

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चीन की मीडिया और रक्षा विशेषज्ञों का दावा है कि यह हथियार युद्ध जैसी स्थिति में सैटेलाइट कमांड सिस्टम, संचार नेटवर्क और निगरानी क्षमताओं को ध्वस्त करने की ताकत रखता है। इसे एक नॉन-काइनेटिक वेपन माना जा रहा है, यानी यह बिना पारंपरिक विस्फोट के दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को निष्क्रिय कर सकता है।

SCMP की रिपोर्ट में सामने आया बड़ा दावा

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट (SCMP) की रिपोर्ट के अनुसार चीन के वैज्ञानिकों ने दुनिया का पहला कॉम्पैक्ट ड्राइवर विकसित किया है, जो इस हाई-पावर माइक्रोवेव हथियार को अत्यधिक ऊर्जा प्रदान करता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह डिवाइस 60 सेकंड तक लगातार 20 गीगावाट ऊर्जा उत्पन्न करने में सक्षम है।

यह शोध चीन के एक पीयर-रिव्यूड जर्नल Chinese High Power Laser and Particle Beams में प्रकाशित किया गया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह तकनीक स्टारलिंक जैसे बड़े सैटेलाइट समूहों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती है।

क्या है TPG1000Cs हथियार?

चीन के इस गुप्त हथियार को TPG1000Cs नाम दिया गया है। इसे शीआन स्थित Northwest Institute of Nuclear Technology में विकसित किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक—

  • इसका वजन करीब 5 टन है

  • लंबाई लगभग 4 मीटर बताई गई है

  • इसे ट्रक, जहाज, विमान और भविष्य में संभवतः अंतरिक्ष में तैनाती के लिए डिजाइन किया गया है

  • यह एक ही सेशन में 3,000 हाई-एनर्जी पल्स छोड़ सकता है

  • अब तक इसके 2 लाख से ज्यादा टेस्ट पल्स सफलतापूर्वक किए जा चुके हैं

वैज्ञानिक वांग गैंग के नेतृत्व में इसे एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि के तौर पर पेश किया जा रहा है।

सैटेलाइट्स के लिए कितना घातक?

चीनी वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यदि किसी माइक्रोवेव हथियार का आउटपुट 1 गीगावाट से अधिक हो, तो वह लो-अर्थ ऑर्बिट में मौजूद सैटेलाइट्स को डैमेज या निष्क्रिय कर सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि स्टारलिंक सैटेलाइट्स अपेक्षाकृत कम ऊंचाई पर स्थित रहते हैं, इसलिए वे ग्राउंड-बेस्ड डायरेक्टेड-एनर्जी हथियारों की चपेट में आने की ज्यादा संभावना रखते हैं।

चीन ने पहले ही यह दावा किया है कि उसके ऊपर मंडराते अमेरिकी सैटेलाइट्स उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हैं। ऐसे में यह हथियार चीन की रणनीतिक तैयारी का हिस्सा माना जा रहा है।

हाई-पावर माइक्रोवेव हथियार कैसे करता है हमला?

HPM हथियार पारंपरिक मिसाइल या बम की तरह विस्फोट नहीं करते। इसके बजाय ये हथियार एंटेना, केबल और ओपनिंग के माध्यम से अत्यधिक शक्तिशाली रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF) एनर्जी छोड़ते हैं।

इसका असर यह होता है कि—

  • इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में वोल्टेज और करंट सर्ज पैदा होता है

  • उपकरण सिर्फ गर्म नहीं होते, बल्कि कंपोनेंट्स जल जाते हैं

  • कई मामलों में सिस्टम स्थायी रूप से खराब हो सकता है

  • कमांड नेटवर्क, रडार, संचार उपकरण एक झटके में ठप हो सकते हैं

यानी यह हथियार दुश्मन को सीधे मारने के बजाय उसके दिमाग और आंखें यानी तकनीकी नेटवर्क को निष्क्रिय कर देता है।

पुराने HPM हथियारों से ज्यादा ताकतवर

रिपोर्ट में बताया गया है कि TPG1000Cs को चीन के पुराने Hurricane सीरीज माइक्रोवेव हथियारों से कहीं अधिक उन्नत माना जा रहा है। पुराने हथियारों की रेंज लगभग 3 किलोमीटर तक सीमित थी, जबकि नए सिस्टम की रेंज इससे कहीं ज्यादा बताई जा रही है।

ताइवान युद्ध में निभा सकता है अहम भूमिका

विशेषज्ञों के अनुसार यह हथियार ताइवान को लेकर संभावित संघर्ष में चीन की रणनीति में बड़ी भूमिका निभा सकता है। मई 2025 में प्रकाशित एक विश्लेषण में कहा गया था कि चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) HPM हथियारों को पहली लहर के हमले में इस्तेमाल कर सकती है, ताकि दुश्मन की तकनीकी क्षमता पहले ही मिनटों में खत्म की जा सके।

HPM हथियारों के संभावित टारगेट हो सकते हैं—

  • कमांड सेंटर

  • रडार इंस्टॉलेशन

  • मिसाइल डिफेंस सिस्टम

  • पावर ग्रिड

  • कम्युनिकेशन नेटवर्क

  • सैटेलाइट कंट्रोल सिस्टम

अमेरिका और पश्चिमी देशों के लिए नई चुनौती

TPG1000Cs के खुलासे के बाद यह साफ है कि चीन अब युद्ध की परिभाषा को पारंपरिक हथियारों से आगे ले जाकर इलेक्ट्रॉनिक और स्पेस वॉरफेयर की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह हथियार वास्तविक युद्ध स्थिति में प्रभावी साबित होता है, तो यह अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए स्पेस-आधारित संचार और निगरानी नेटवर्क को बचाना एक बड़ी चुनौती बन जाएगा।

चीन की यह नई तकनीक आने वाले समय में वैश्विक सुरक्षा संतुलन को प्रभावित कर सकती है और अंतरिक्ष को युद्ध का नया मैदान बना सकती है।

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