
ढाका। भारत के पड़ोस में चीन की सैन्य उपस्थिति लगातार बढ़ती जा रही है। बांग्लादेश की मोहम्मद यूनुस सरकार ने चीन के साथ एक ड्रोन निर्माण सुविधा (UAV Factory) स्थापित करने का समझौता किया है। इस फैसले को दक्षिण एशिया के रणनीतिक परिदृश्य में बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
चटगांव में बनेगी हाई-टेक ड्रोन फैक्ट्री
समझौते के तहत चटगांव जिले में एक अत्याधुनिक ड्रोन निर्माण और असेंबलिंग सुविधा स्थापित की जाएगी। इस फैक्ट्री में सैन्य और नागरिक दोनों उद्देश्यों के लिए मानवरहित हवाई वाहन तैयार किए जाएंगे। बांग्लादेश एयरफोर्स और चीन की सरकारी रक्षा कंपनी China Electronics Technology Group Corporation International के बीच जनवरी 2026 में समझौता हुआ।
भारत के लिए बड़ा झटका
इस फैसले को भारत के लिए स्ट्रेटजिक चुनौती माना जा रहा है। जिस जगह पर अब ड्रोन फैक्ट्री स्थापित हो रही है, वह पहले भारत के लिए विशेष आर्थिक क्षेत्र के रूप में आवंटित की गई थी। 2015 में ढाका ने भारतीय कंपनियों के लिए लगभग 1,000 एकड़ जमीन आवंटित की थी, लेकिन नई दिल्ली की सुस्ती और बाद में यूनुस सरकार के आने के बाद यह योजना रद्द कर दी गई। जनवरी 2026 में भारतीय जोन का आवंटन भी वापस ले लिया गया।
चीन का टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर हस्तांतरण
ढाका ने इसे बांग्लादेश की आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बताया है। चीन न केवल ड्रोन निर्माण के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करेगा, बल्कि तकनीकी ज्ञान और प्रशिक्षण का भी ट्रांसफर करेगा। यह समझौता ढाका कैंटोनमेंट स्थित बांग्लादेश एयरफोर्स मुख्यालय में हस्ताक्षरित हुआ।
बांग्लादेश-चीन रक्षा संबंध मजबूत
इस ड्रोन फैक्ट्री से चीन और बांग्लादेश के सैन्य संबंधों में नया आयाम जुड़ गया है। चीन पहले ही बांग्लादेश के रक्षा हार्डवेयर का मुख्य सप्लायर रहा है। इसके अलावा, बांग्लादेश J-10C मल्टीरोल फाइटर जेट्स खरीदने के लिए लगभग 2.2 अरब डॉलर का सौदा अंतिम रूप देने जा रहा है।
भारत के लिए रणनीतिक चुनौती
विश्लेषकों के अनुसार, यह ड्रोन फैक्ट्री सिर्फ एक निर्माण सुविधा नहीं है, बल्कि चीन की गहरी सैन्य पैठ का संकेत है। चीन पहले ही बांग्लादेश में पनडुब्बी बेस और रेडार सिस्टम बनाने में शामिल है। कॉक्स बाजार में पनडुब्बी बेस की मौजूदगी भारत के अंडमान-निकोबार कमांड के लिए चिंता का विषय है।
ड्रोन और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के साथ, चीन बांग्लादेश में अपनी सैन्य क्षमता को लगातार मजबूत कर रहा है। शेख हसीना के बाद भारत-बांग्लादेश रिश्ते तनावपूर्ण हैं, और इस फैसले से नई दिल्ली के लिए सुरक्षा चिंता बढ़ने की संभावना है।