Thursday, May 14

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बिहार में फर्जी ‘पुलिस-मित्र’ भर्ती का रैकेट फूटा, गैंग का सरगना और साथी फरार, पुलिस कर रही छापेमारी

मोतिहारी/समस्तीपुर (बिहार): बिहार के मोतिहारी में ‘पुलिस-मित्र’ की नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगारों से ठगी करने वाले गैंग का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है और गैंग के मुख्य सरगना सहित तीन लोगों पर इनाम घोषित किया है।

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गिरफ्तार आरोपियों और सरगना की पहचान

पूर्वी चंपारण पुलिस ने मोतिहारी के चिरैया से अशरफ कमाल और मुजफ्फरपुर से विनीत कुमार को गिरफ्तार किया। पूछताछ में पुलिस को पता चला कि गैंग का मुख्य सरगना अशोक सम्राट है, जो समस्तीपुर का रहने वाला है। उसके साथी हैं धर्मेंद्र कुमार और राकेश कुमार

एसपी स्वर्ण प्रभात ने बताया कि गैंग बेरोजगार युवाओं से 25 से 45 हजार रुपये लेकर उन्हें ‘पुलिस-मित्र’ की नौकरी दिलाने का झांसा देता था। गिरफ्तार आरोपी विनीत कुमार के खुलासे के बाद, पुलिस ने गैंग लीडर अशोक पर 15 हजार रुपये और धर्मेंद्र व राकेश पर 10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है।

ठगी का तरीका और शिकार

पुलिस के अनुसार, गैंग ने पूर्वी चंपारण के 24 युवाओं को ‘पुलिस-मित्र’ के रूप में नौकरी दिलाने का भरोसा देकर ठगी की। युवाओं को एनजीओ की आड़ में, मासिक 16 हजार रुपये की सैलरी का लालच दिया गया। इसके बाद उन्हें मुजफ्फरपुर, सारण और पटना में नकली ट्रेनिंग दिलाई गई।

राज्यभर में छापेमारी जारी

एसपी स्वर्ण प्रभात ने कहा कि मुजफ्फरपुर, पटना, पूर्वी चंपारण, रोहतास, छपरा और समस्तीपुर में गैंग के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए एसआईटी टीम सक्रिय है। साथ ही पुलिस ने इस रैकेट में कथित संलिप्तता के लिए कुछ पुलिस अधिकारियों और डिजिटल मीडिया व्यवसाय से जुड़े लोगों की भी जांच के आदेश दिए हैं।

“सूचना देने वालों के नाम गुप्त रखे जाएंगे। हम गैंग के सभी सदस्य पकड़कर कानून के कटघरे में लाएंगे।” – एसपी स्वर्ण प्रभात

बेरोजगार युवाओं को झांसे में लेकर ठगी करने वाला यह रैकेट राज्य के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है।

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