Tuesday, February 3

बिहार की सबसे बड़ी बीमारी: कुत्ते का काटना! रोजाना 776 लोग शिकार

पटना: बिहार के आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 में सामने आया है कि वर्ष 2024–25 के दौरान राज्य में कुत्ते के काटने के 2.83 लाख से अधिक मामले दर्ज किए गए। यानी औसतन हर दिन 776 लोग इस हादसे का शिकार हुए। यह पिछले साल की तुलना में लगभग 39 हजार अधिक है। आर्थिक सर्वेक्षण में इसे राज्य में सबसे ‘व्यापक बीमारी’ के रूप में चिन्हित किया गया है।

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रिपोर्ट के अनुसार, कुल 2,83,274 लोग कुत्ते के काटने का शिकार हुए, जबकि 2023–24 में यह संख्या 2,44,367 थी। दूसरी सबसे व्यापक बीमारी एक्यूट रेस्पिरेटरी इंफेक्शन (एआरआई) रही, जिसमें 31,025 मामले दर्ज किए गए।

जिला-wise आंकड़े:
पटना में सबसे अधिक 29,280 मामले सामने आए, इसके बाद पूर्वी चंपारण (24,452), नालंदा (19,637), गोपालगंज (18,879), पश्चिमी चंपारण (17,820), जहानाबाद (12,900), गया (10,794), भोजपुर (10,496), पूर्णिया (10,373) और वैशाली (10,155) शामिल हैं। वहीं रोहतास (1,967), सुपौल (1,878), खगड़िया (1,565) और औरंगाबाद (467) में सबसे कम मामले दर्ज हुए।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, कुत्ते, बिल्ली, चमगादड़ या बंदर के काटने से फैलने वाला रेबीज गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। हर साल अनुमानित 59,000 लोग रेबीज से मरते हैं, जिनमें अधिकांश मौतें संक्रमित कुत्तों के काटने से होती हैं। रेबीज से बचाव के लिए टीका उपलब्ध है और संपर्क के तुरंत बाद उपचार से जान बचाई जा सकती है।

साथ ही रिपोर्ट में सांप के काटने की घटनाओं को भी चिंता का विषय बताया गया है। वर्ष 2024–25 में बिहार में सांप के काटने से 138 मौतें दर्ज की गईं।

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