
नई दिल्ली: बजट 2026 के कागजातों के अनुसार भारत की स्टील इंडस्ट्री अगले वित्त वर्ष में कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) में भारी बढ़ोतरी करने जा रही है। यह निवेश मुख्य रूप से नई मशीनरी और प्लांट पर किया जाएगा, जिससे न केवल उत्पादन क्षमता बढ़ेगी बल्कि रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि होगी।
कैपेक्स में 44% की बढ़ोतरी
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए आम बजट के अनुसार, स्टील बनाने वाली सरकारी कंपनियों का कैपेक्स वित्त वर्ष 2026-27 में लगभग 25,125 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। यह पिछले साल के मुकाबले 44% की बढ़ोतरी है।
सबसे आगे SAIL और NMDC
केंद्रीय बजट के अनुसार महारत्न स्टील PSU स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) और नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NMDC) सबसे आगे हैं। इन दोनों कंपनियों का Capex क्रमशः 50% तक बढ़ने की संभावना है। SAIL का कैपेक्स 15,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है, जबकि NMDC का कैपेक्स 9,000 करोड़ रुपये तक बढ़ेगा। इसके अलावा, मैंगनीज ओर इंडिया लिमिटेड (MOIL) 800 करोड़ रुपये खर्च करेगी।
भारत की स्थिति और लक्ष्य
दुनिया में स्टील उत्पादन में भारत वर्तमान में दूसरा सबसे बड़ा देश है, जहां हर साल लगभग 205 मिलियन टन स्टील का उत्पादन होता है। चीन इससे काफी आगे है और सालाना 1,200 मिलियन टन से ज्यादा स्टील बनाता है। भारत की नेशनल स्टील पॉलिसी (NSP) 2017 के अनुसार, सरकार का लक्ष्य 2030-31 तक 300 मिलियन टन की स्टील उत्पादन क्षमता हासिल करना है। इसके लिए 2023-31 तक लगभग 45-50 अरब डॉलर के निवेश की आवश्यकता होगी।
स्टील सेक्टर में मौजूदा हालात
हालांकि दुनिया भर में स्टील कंपनियां मंदी का सामना कर रही हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में स्टील की कीमतें धीरे-धीरे बढ़ेंगी। नोमुरा की रिपोर्ट के अनुसार, हाल की गिरावट मौसमी है और वित्त वर्ष 2027-28 तक मांग फिर बढ़ने की संभावना है। इसका कारण ऑटोमोबाइल सेक्टर में सुधार, इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार, मैन्युफैक्चरिंग में बढ़ोतरी और अन्य उद्योगों की मजबूती है।
ग्रीन स्टील की दिशा में कदम
दुनिया भर में कंपनियां ग्रीन स्टील की ओर बढ़ रही हैं, जिसका मतलब है कम प्रदूषण के साथ स्टील उत्पादन। ICRA रेटिंग्स के अनुमान के अनुसार, भारत में ग्रीन स्टील का हिस्सा 2030 तक कुल मांग का 2% होगा, जो 2040 में लगभग 10% और 2050 तक 40% तक पहुंच जाएगा। सरकारी स्टील कंपनियां इस दिशा में सक्रिय प्रयास कर रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बजट 2026 में कैपेक्स बढ़ोतरी से न केवल उत्पादन में सुधार होगा, बल्कि रोजगार और तकनीकी निवेश में भी बढ़ोतरी होगी, जिससे भारत की स्टील इंडस्ट्री वैश्विक प्रतिस्पर्धा में और मजबूत होगी।