
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में जलापूर्ति और पानी की बर्बादी को नियंत्रित करने के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सरकार ने चंद्रावल में नया जल शोधन संयंत्र बनाने की घोषणा की है। 599 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह संयंत्र 105 एमजीडी क्षमता वाला होगा और वर्ष 2026 में चालू होने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस परियोजना से दिल्ली के लगभग 92 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को स्वच्छ पानी उपलब्ध होगा, जो राजधानी के कुल क्षेत्रफल का लगभग 6.20 प्रतिशत है। चंद्रावल संयंत्र से मॉडल टाउन, सदर बाजार, चांदनी चौक, मटिया महल, करोल बाग, पटेल नगर, राजेंद्र नगर, आर. के. पुरम जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में जलापूर्ति व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
जल बोर्ड की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि नई परियोजना से पानी की लीकेज और तकनीकी नुकसान में उल्लेखनीय कमी आएगी और जल आपूर्ति की गुणवत्ता बेहतर होगी।
पाइपलाइन सुधार और वितरण प्रणाली:
योजना के तहत 1,331 करोड़ रुपये की लागत से पानी की सप्लाई और घरों तक पहुंचाने वाली पाइप लाइनों को भी बदला जा रहा है। करोल बाग, सिविल लाइंस, कमला नगर, मलकागंज, शादीपुर, पटेल नगर, शास्त्री नगर, नारायणा, जखीरा, न्यू राजेंद्र नगर, हिंदूराव, ईदगाह, झंडेवालान, रिज रोड, रामलीला ग्राउंड और सुभाष पार्क जैसे क्षेत्रों में नॉन रेवेन्यू वाटर को तीन वर्ष में 30-45 प्रतिशत से घटाकर 15 प्रतिशत से नीचे लाने का लक्ष्य रखा गया है।
परियोजना का इतिहास:
चंद्रावल जल शोधन संयंत्र को वर्ष 2012 में स्वीकृति मिली थी, लेकिन पूर्ववर्ती सरकार की लापरवाही के कारण काम रुका रहा। बार-बार टेंडर रद्द होने और तकनीकी बाधाओं के चलते परियोजना में देरी हुई और लागत में 400 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई। वर्तमान सरकार ने जाइका और भारत सरकार के सहयोग से अतिरिक्त बजट और तकनीकी बाधाओं को दूर करके परियोजना को गति दी है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि यह परियोजना दिल्ली की जलापूर्ति व्यवस्था को मजबूत करेगी और राजधानी में पानी की समस्या को दूर करने में अहम भूमिका निभाएगी।