
नई दिल्ली: राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने संसद के बजट सत्र में प्राइवेट अस्पतालों में इलाज के नाम पर हो रही मनमानी वसूली और बढ़ती कीमतों पर चिंता जताई। उन्होंने सरकार से ‘क्लीनिकल स्टेब्लिशमेंट एक्ट’ को सभी राज्यों में लागू करने, पारदर्शी बिलिंग सुनिश्चित करने और इमरजेंसी में इलाज पहले, बिल बाद में देने की मांग की।
स्वाति मालीवाल ने कहा कि निजी अस्पतालों में भर्ती होने से पहले ही ₹50,000 से 1,00,000 तक एडवांस जमा करना पड़ता है। अस्पतालों के कमरों का किराया 5 स्टार होटल से भी महंगा है। इसके अलावा, थर्मामीटर, सैनिटाइज़र, ग्लव्स जैसी चीजें भी बिल में जोड़ी जाती हैं। मरीजों को दवाएं और लैब टेस्ट केवल अस्पताल के रेट पर उपलब्ध होते हैं, जबकि बाहर उन्हें सस्ते में खरीदा जा सकता है।
सांसद ने बताया कि डायग्नोस्टिक टेस्ट और दवाओं के बिल बढ़ाकर लिखे जाते हैं, और कई बार जेनेरिक दवाओं की जगह महंगी दवाएं दी जाती हैं। बिल में छिपे हुए चार्जेस भी मरीजों को अतिरिक्त बोझ डालते हैं।
मेडिकल बीमा का मामला:
स्वाति मालीवाल ने कहा कि बीमा प्रीमियम इतना महंगा है कि लोग इसे छोड़ रहे हैं। साथ ही बीमा कंपनियां अक्सर छोटे कारणों से दावा खारिज कर देती हैं।
सांसद ने केंद्र सरकार से चार प्रमुख मांगें रखीं:
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क्लीनिकल स्टेब्लिशमेंट एक्ट को सभी राज्यों में लागू करना।
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इमरजेंसी केयर में इलाज पहले, बिल बाद में देना।
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अस्पतालों में पारदर्शी और उचित बिलिंग सुनिश्चित करना।
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इंश्योरेंस प्रीमियम पर सख्त निगरानी रखना।
स्वाति मालीवाल ने जोर देकर कहा कि इलाज की जरूरत हर व्यक्ति को कभी न कभी होती है, इसलिए सरकार को आम जनता के लिए सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं को बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए।