Monday, February 2

पूर्व आर्मी चीफ एम.एम. नरवणे पर बयान को लेकर संसद में संग्राम, जानिए कौन हैं जनरल नरवणे

नई दिल्ली: पूर्व भारतीय सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे के कथित बयान को लेकर सोमवार को लोकसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखा टकराव देखने को मिला। विवाद की शुरुआत विपक्ष के नेता राहुल गांधी के उस दावे से हुई, जिसमें उन्होंने एक मैगजीन में प्रकाशित कथित उद्धरण का हवाला देते हुए चीन से जुड़े मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश की। दावा किया गया कि यह उद्धरण नरवणे की एक अप्रकाशित पुस्तक का हिस्सा है।

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राहुल गांधी के बयान पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कड़ी आपत्ति जताई। हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई और अंततः कार्यवाही मंगलवार तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। हंगामे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सदन में मौजूद थे।

कथित किताब पर बढ़ा विवाद
विवाद जनरल नरवणे की कथित अप्रकाशित संस्मरण को लेकर है। राहुल गांधी ने एक मैगजीन रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि पुस्तक में ‘डोकलाम में चीनी टैंकों’ का उल्लेख है। इस पर सत्ता पक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी। अमित शाह ने कहा कि किसी मैगजीन में प्रकाशित सामग्री को प्रमाण नहीं माना जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना सत्यापन के ऐसे दावे सदन में रखना उचित नहीं है।

इस बीच भाजपा नेता अमित मालवीय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जनरल नरवणे का एक पुराना वीडियो साझा किया, जिसमें वे कहते सुनाई दे रहे हैं कि “एक भी इंच जमीन नहीं गई।” इस वीडियो के सामने आने के बाद राहुल गांधी के दावों पर नई बहस छिड़ गई।

कौन हैं जनरल एम.एम. नरवणे
जनरल मनोज मुकुंद नरवणे भारतीय सेना के 27वें प्रमुख रहे हैं। उन्होंने 31 दिसंबर 2019 को जनरल बिपिन रावत से सेना प्रमुख का पदभार संभाला था। वे 15 दिसंबर 2021 से 30 अप्रैल 2022 तक चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी के कार्यवाहक अध्यक्ष भी रहे।

22 अप्रैल 1960 को पुणे में जन्मे नरवणे एक सैन्य परिवार से आते हैं। उनके पिता भारतीय वायु सेना में अधिकारी थे। नरवणे ने नेशनल डिफेंस एकेडमी, पुणे और इंडियन मिलिट्री एकेडमी, देहरादून से प्रशिक्षण प्राप्त किया। उन्होंने रक्षा अध्ययन में एम.फिल की उपाधि भी हासिल की है।

जून 1980 में उन्हें सिख लाइट इन्फैंट्री की 7वीं बटालियन में कमीशन मिला। अपने लंबे सैन्य करियर के दौरान उन्होंने जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रीय राइफल्स की दूसरी बटालियन, 106 इन्फैंट्री ब्रिगेड और असम राइफल्स की कमान संभाली। कश्मीर और पूर्वोत्तर में आतंकवाद और उग्रवाद विरोधी अभियानों का नेतृत्व करने का उन्हें व्यापक अनुभव है।

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