
नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को पेश किए गए बजट 2026-27 में प्रदूषण नियंत्रण के लिए आवंटित फंड में कटौती की है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए प्रदूषण नियंत्रण के लिए 1,091 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो पिछले साल के संशोधित अनुमान 1,300 करोड़ रुपये से 209 करोड़ रुपये कम हैं।
कहां जाएगा फंड
यह फंड राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) और प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों, समितियों के संचालन के लिए है। NCAP 82 शहरों में वायु गुणवत्ता की निगरानी करता है।
विशेषज्ञों की नाराज़गी
- सुनील दहिया, एनवायरोकेटलिस्ट: उन्होंने कहा कि बजट प्रदूषण संकट वाले क्षेत्रों जैसे दिल्ली-एनसीआर और उत्तर भारत के लिए समर्पित नहीं है। उन्होंने ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर में केंद्रित सहायता की कमी को भी चूक बताया।
- अनुमिता रॉयचौधरी, CSE: उन्होंने कहा कि आवंटन संकट के पैमाने से मेल नहीं खाता और NCAP 2.0 का विस्तार केंद्रीय फंडिंग के बिना चुनौतीपूर्ण रहेगा।
- अमित गुप्ता, पर्यावरण कार्यकर्ता: उन्होंने बजट को निराशाजनक बताया। NCAP आवंटन में लगभग 200 करोड़ रुपये की कटौती हुई है। वित्त वर्ष 2024-25 में 900 करोड़ रुपये में से केवल 16 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे।
कुछ सकारात्मक पहलें
- क्लाइमेट ट्रेंड्स की आरती खोसला: रूफटॉप सोलर पैनल के लिए रिकॉर्ड एलोकेशन हुआ है।
- IEEFA (दक्षिण एशिया) की विभूति: ट्रांसपोर्ट इलेक्ट्रिफिकेशन में बजट सपोर्ट कमजोर रहा, जबकि EV अपनाने से तुरंत पब्लिक हेल्थ लाभ मिल सकते थे।
- एनवायरमेंट एजुकेशन और कैपेसिटी बिल्डिंग: FY 2026-27 के लिए 104 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, जो पिछले साल से 29 करोड़ रुपये ज्यादा हैं।
निष्कर्ष
हालांकि बजट में क्लीन एनर्जी और पर्यावरण शिक्षा के लिए कुछ बढ़ोतरी की गई है, लेकिन एयर पॉल्यूशन नियंत्रण के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं मिलने से दिल्ली और अन्य प्रदूषण प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य और पर्यावरणीय चुनौतियां बनी रहेंगी।