
नई दिल्ली: अब डिप्रेशन की पहचान सिर्फ टेस्ट और सवाल-जवाब तक सीमित नहीं रहेगी। दिल्ली के एम्स (AIIMS) के डॉक्टरों का कहना है कि किसी व्यक्ति की आवाज भी उसकी मानसिक स्थिति बता सकती है। एम्स की स्पीच हेल्थ लैब में किए गए शोध में यह साबित हुआ है कि बोलने के तरीके का विश्लेषण कर डिप्रेशन के शुरुआती लक्षण पहचाने जा सकते हैं।
खास लैब और रिसर्च
एम्स के सायकायट्री विभाग के डॉ. नंद कुमार के अनुसार, कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) के CSR सहयोग से एम्स में अत्याधुनिक स्पीच हेल्थ लैब विकसित की गई है। यहां AI तकनीक का इस्तेमाल कर आवाज के भाषाई और भावनात्मक संकेतों का विश्लेषण किया जाता है। पिछले दो वर्षों में लैब ने 423 प्रतिभागियों के स्पीच सैंपल और मानसिक स्वास्थ्य आकलन पर अध्ययन किया।
रिसर्च के आंकड़े
- प्रतिभागियों की संख्या: 423 (पुरुष 179 – 42.3%, महिलाएं 244 – 57.7%)
- डिप्रेशन के लक्षण (PHQ 9 ≥ 10): 134 प्रतिभागी – 31.7%
- डिप्रेशन के स्पष्ट लक्षण नहीं पाए गए: 289 प्रतिभागी – 68.3%
- डिप्रेशन पहचान की सटीकता: 78%
नई दिशा मिली मानसिक स्वास्थ्य क्षेत्र में
विशेषज्ञों का कहना है कि आवाज के पैटर्न, टोन और ऊर्जा में बदलाव डिप्रेशन के संकेत दे सकते हैं। यह तकनीक डॉक्टरों का विकल्प नहीं, बल्कि शुरुआती पहचान और समय पर इलाज में सहायक टूल बन सकती है।
डिप्रेशन की गंभीरता और बढ़ती चुनौती
- दुनिया भर में डिप्रेशन से प्रभावित लोग: 26 करोड़ से अधिक
- भारत में: हर 20 में से 1 व्यक्ति (लगभग 5.3%) जीवन में कभी न कभी डिप्रेशन से जूझ चुका
कॉलेज स्टूडेंट्स में तेजी से बढ़ रहा खतरा
NIMHANS के बड़े अध्ययन में 9 राज्यों के 15 शहरों की 30 यूनिवर्सिटी के 8,542 स्टूडेंट्स शामिल थे। नतीजे:
- 18.8% स्टूडेंट्स ने जीवन में आत्महत्या के विचार आने की बात कही
- 12.4% ने पिछले एक साल में ऐसे विचार होने की जानकारी दी
- 6.7% ने आत्महत्या का प्रयास किया
- 33.6% में मध्यम से गंभीर डिप्रेशन के लक्षण
- 23.2% में गंभीर एंग्जायटी
- केवल 38.1% छात्रों ने अपने आत्महत्या के विचार किसी से साझा किए, ज्यादातर दोस्तों से
निष्कर्ष
यह रिसर्च मानसिक स्वास्थ्य क्षेत्र में एक नई दिशा दिखाती है। शुरुआती पहचान के जरिए समय पर इलाज की संभावना बढ़ाने के साथ, छात्रों और युवाओं में बढ़ते मानसिक स्वास्थ्य संकट को कम करने में मदद मिल सकती है।