
मसूरी। मसूरी नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष मीरा सकलानी ने पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष अनुज गुप्ता और किन संस्था पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वर्तमान बोर्ड पर लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह भ्रामक और तथ्यहीन हैं, जबकि असली “खेल” पूर्व बोर्ड के कार्यकाल में हुआ है, जिसमें पर्यावरण मित्रों के अधिकारों का खुलेआम हनन किया गया।
पालिका अध्यक्ष ने कहा कि हाल ही में पर्यावरण मित्रों और किन संस्था के कर्मचारियों की हड़ताल के पीछे उन्हें गुमराह किया गया। कर्मचारियों को यह बताया गया कि वर्तमान बोर्ड उनके हितों के खिलाफ काम कर रहा है और डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन कंपनी के साथ अनियमितताएं की जा रही हैं, जबकि सच्चाई इसके ठीक उलट है।
ऑनलाइन टेंडर से मिला कार्य, किन संस्था ने नहीं लिया हिस्सा
मीरा सकलानी ने बताया कि 1 जनवरी 2025 से मसूरी में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन का कार्य लॉर्ड शिवा कंपनी को नियमानुसार ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से दिया गया। इस प्रक्रिया में कुल सात कंपनियों ने भाग लिया, जबकि किन संस्था ने टेंडर में हिस्सा ही नहीं लिया।
उन्होंने कहा कि ₹25 लाख से अधिक के सभी टेंडर ऑनलाइन होना अनिवार्य हैं, लेकिन पूर्व अध्यक्ष ने निजी स्वार्थों के चलते नियमों के विपरीत ऑफलाइन टेंडर कराए, जो पूरी तरह गलत थे।
कर्मचारियों की संख्या में गड़बड़ी, फर्जी समायोजन का आरोप
पालिका अध्यक्ष ने खुलासा किया कि किन संस्था ने कागजों में 169 कर्मचारियों को दर्शाया, जबकि केवल 112 कर्मचारियों को ही ईएसआई और पीएफ के दायरे में लाया गया। शेष कर्मचारियों को कथित रूप से “एडजस्ट” किया गया, जिनका जमीनी स्तर पर कोई अस्तित्व नहीं मिला।
उन्होंने बताया कि पूर्व में किन संस्था को हर माह लगभग ₹10.30 लाख का भुगतान किया जाता था। भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए हर तीन कर्मचारियों पर एक सुपरवाइजर नियुक्त किया गया, जिनका कोई वास्तविक कार्य नहीं था।
समान वेतन नीति लागू, इसलिए हो रहा विरोध
मीरा सकलानी ने कहा कि वर्तमान में लॉर्ड शिवा कंपनी द्वारा समान काम–समान वेतन की नीति लागू की गई है। इससे पूर्व अध्यक्ष के चहेते सिस्टम से बाहर हो रहे हैं, इसी कारण कर्मचारियों को भड़काकर माहौल खराब किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि पूर्व कार्यकाल में पर्यावरण मित्रों को मात्र ₹8,000 प्रतिमाह वेतन दिया जाता था, जबकि वर्ष 2022 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दैनिक वेतन ₹500 तय करने की घोषणा की थी, जिसे जानबूझकर लागू नहीं किया गया। उनके अध्यक्ष बनने के बाद यह घोषणा लागू की गई, जिससे अब पर्यावरण मित्रों को ₹17,000 से अधिक मासिक वेतन, साथ ही ईएसआई और पीएफ का पूरा लाभ मिल रहा है।
बायोमैथेन प्लांट पर भी सवाल
पालिका अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि पूर्व बोर्ड द्वारा आईडीएच एमआरएफ सेंटर के पास करीब ₹1.5 करोड़ की लागत से बायोमैथेन प्लांट का उद्घाटन तो किया गया, लेकिन प्लांट कभी संचालित नहीं हुआ। वर्तमान में उसकी स्थिति खंडहर जैसी है, जो बड़े घोटाले की ओर इशारा करती है।
मोहल्ला समिति कर्मचारियों को मिलेगा न्याय
उन्होंने कहा कि पूर्व बोर्ड ने मोहल्ला समिति में कार्यरत पर्यावरण मित्रों को गलत तरीके से ठेका प्रथा में धकेल दिया। इसे सुधारने के लिए आगामी बोर्ड बैठक में प्रस्ताव लाया जाएगा और स्वीकृति मिलते ही 25 कर्मचारियों को पुनः मोहल्ला समिति में शामिल किया जाएगा।
नियम सर्वोपरि, किसी का रोजगार नहीं छीना जाएगा
मीरा सकलानी ने साफ कहा कि नगर पालिका किसी का रोजगार छीनना नहीं चाहती, लेकिन नियम सर्वोपरि हैं। लॉर्ड शिवा कंपनी को भी चेतावनी दी गई है कि यदि नियमों का पालन नहीं किया गया या कर्मचारियों के हितों की अनदेखी हुई, तो कंपनी पर कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि वर्तमान बोर्ड पूरी पारदर्शिता के साथ कार्य कर रहा है और पूर्व में हुए घोटालों को सबूतों सहित जनता के सामने रखा जाएगा।
इस अवसर पर सभासद विशाल खारोला, सचिन गुहेर, गौरी थपलियाल, शिवानी भारती, रणबीर कंडारी और पवन थलवाल मौजूद रहे।