
जयपुर: राजस्थान सरकार ने विधानसभा में खुलासा किया है कि पिछले दो वर्षों में शराब पर लगे 20% सरचार्ज से राज्य को 1,380.7 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। इसके बावजूद सरकार ने गौशालाओं और मवेशी संरक्षण पर इस राशि से कहीं अधिक, यानी 2,340 करोड़ रुपये खर्च किए। इस आंकड़े से स्पष्ट होता है कि प्रदेश में ‘गो-सेवा’ को लेकर वित्तीय संसाधनों की कोई कमी नहीं आने दी जा रही है।
शराब से सेवा तक का आंकड़ों का गणित
कांग्रेस विधायक रफीक खान के सवाल के लिखित जवाब में सरकार ने बताया कि वित्त वर्ष 2023-24 और 2024-25 के दौरान शराब की बिक्री पर लगे 20% सरचार्ज से कुल 1,380.7 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। इसमें 2023-24 में 631.04 करोड़ और 2024-25 में 749.66 करोड़ रुपये शामिल हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 118 करोड़ रुपये अधिक हैं।
कमाई से दोगुना खर्च: 2,340 करोड़ का ‘गौ–कल्याण’
सरकार ने सरचार्ज से हुई कमाई से कहीं अधिक राशि गौशालाओं और मवेशियों की सुरक्षा पर खर्च की। आंकड़ों के अनुसार, इन दो वर्षों में गौशालाओं और गोवंश संरक्षण कार्यक्रमों को कुल 2,340 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय सहायता दी गई। यह राशि केवल शराब सरचार्ज से ही नहीं, बल्कि स्टाम्प ड्यूटी के अधिभार और गोसंवर्धन एवं संरक्षण कोष नियम, 2016 के तहत एकत्रित अन्य राजस्व को मिलाकर खर्च की गई।
नशामुक्ति के लिए अलग बजट नहीं
सदन में यह भी स्पष्ट किया गया कि आबकारी विभाग द्वारा वसूले गए सरचार्ज का कोई हिस्सा विशेष रूप से नशामुक्ति या नशा विरोधी अभियानों के लिए अलग से नहीं रखा गया। पूरी राशि केवल ‘गो-सेवा’ और मवेशियों के संरक्षण पर खर्च की गई। सरकार ने विपक्ष के सवाल के जवाब में कहा कि ‘गौ माता’ के संरक्षण के लिए संसाधनों की कमी कभी नहीं आने दी जाएगी और विभिन्न राजस्व स्रोतों का उपयोग उनकी देखभाल और भलाई के लिए निरंतर किया जाएगा।
राजस्थान में यह पहल यह दिखाती है कि राज्य सरकार शराब राजस्व को भी गो-सेवा जैसे कल्याणकारी कार्यों में प्रभावी तरीके से लगाकर मवेशियों के संरक्षण को प्राथमिकता दे रही है।