
जयपुर: आज राजस्थान की उपमुख्यमंत्री और जयपुर राजघराने की लाडली दीया कुमारी अपना जन्मदिन मना रही हैं। शाही महलों की आरामदायक जिंदगी छोड़कर राजनीति की कठिन राहों पर उतरने वाली दीया कुमारी ने अपने कार्य और संघर्ष से यह साबित किया कि वे केवल ‘राजकुमारी’ नहीं, बल्कि जनता की ‘दीया’ भी हैं।
राजसी विरासत और आधुनिक दृष्टिकोण
जयपुर के पूर्व महाराजा सवाई भवानी सिंह और पद्मिनी देवी की इकलौती संतान दीया कुमारी की शिक्षा लंदन और भारत के प्रतिष्ठित संस्थानों में हुई। कला, संस्कृति और सामाजिक गतिविधियों के प्रति उनके लगाव ने उन्हें जनता से हमेशा जोड़े रखा। राजनीति में उनका कदम 2013 में पड़ा, जब उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में भाजपा का दामन थामा।
चुनावी रण में ‘अजेय’ योद्धा
दीया कुमारी ने अपने पहले ही चुनाव में (सवाई माधोपुर, 2013) भारी मतों से जीत दर्ज की। इसके बाद 2019 में राजसमंद लोकसभा सीट से 5.51 लाख वोटों की ऐतिहासिक जीत ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर की राजनीति में स्थापित किया। 2023 के विधानसभा चुनाव में विद्याधर नगर से उनकी प्रचंड जीत ने उन्हें राजस्थान की उपमुख्यमंत्री पद की राह आसान कर दी। उनका यह सफर किसी रोमांचक राजनीतिक फिल्म से कम नहीं है।
वित्त मंत्री के रूप में नई भूमिका
वर्तमान में उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री के रूप में दीया कुमारी प्रदेश की अर्थव्यवस्था और विकास की दिशा तय कर रही हैं। चाहे महिलाओं के लिए ‘लाडो प्रोत्साहन योजना’ हो या राज्य के पर्यटन को वैश्विक स्तर तक ले जाना, उनका विजन स्पष्ट और ठोस है।
जनता के विश्वास का प्रतीक
सादगी, शालीनता और कड़े निर्णयों के लिए जानी जाने वाली दीया कुमारी का यह सफर यह संदेश देता है कि विरासत में मिली पहचान को मेहनत, लगन और जनता के विश्वास में कैसे बदला जा सकता है। आज उनके जन्मदिन पर पूरे प्रदेश से उन्हें बधाइयां और शुभकामनाएं मिल रही हैं।