
नई दिल्ली: दिल्ली में रोजाना टीनएजर्स लापता हो रहे हैं। नवजात से लेकर किशोरों तक इस फेहरिस्त में शामिल हैं, लेकिन हाल की पुलिस रिपोर्ट के अनुसार 12 से 18 साल की उम्र की लापता लड़कियों की संख्या लड़कों की तुलना में अधिक है।
मुख्य तथ्य:
- 2015 से 2025 तक कुल 56,119 टीनएजर्स लापता हुए।
- इनमें 40,287 लड़कियां और 15,832 लड़के शामिल हैं। यानी लापता होने वालों में लगभग 72 फीसदी लड़कियां हैं।
- कुल 50,168 को ढूंढ लिया गया, लेकिन 5,951 का आज तक कोई सुराग नहीं मिला।
सोशल मीडिया और ऑनलाइन दोस्ती का असर:
- लापता होने वाले मामलों में 35% का संबंध भावनात्मक/लव अफेयर से, 30% का सोशल मीडिया या ऑनलाइन संपर्क से, और 25% का घरेलू तनाव/पाबंदियों से जुड़ा था।
- केवल 10% किशोर मानसिक रूप से कमजोर थे।
मिडल क्लास के लड़कियां ज्यादा शिकार:
- पुलिस के अनुसार, कई लड़कियों को ऑनलाइन दोस्ती और भावनात्मक ब्लैकमेल के जरिए बहकाया गया।
- शादी या बेहतर जिंदगी का झांसा, घर की सख्ती से बचने की चाह और धोखे में फंसना—ये तीन मुख्य वजहें 85% मामलों में सामने आई।
- माता-पिता की व्यस्तता और बच्चों का मोबाइल/ऑनलाइन क्लास में समय बिताना भी कारणों में शामिल है।
विशेषज्ञों की राय:
- PSRI हॉस्पिटल के सायकायट्रिस्ट डॉ. परमजीत सिंह बताते हैं कि किशोरों का यह शारीरिक और मानसिक बदलाव का दौर है।
- नई चीजों की जिज्ञासा, भावनात्मक उत्तेजना और परिवार/समाज से अलग सोच उन्हें बहकने के लिए संवेदनशील बनाती है।
पुलिस और विशेषज्ञों का कहना है कि परिवार और समाज को किशोरों पर नजर रखकर, संवाद और समझ के जरिए उन्हें सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है।