
गाजियाबाद।
उत्तर प्रदेश में एक ओर जहां सरकार एकमुश्त समाधान योजना के जरिए बिजली उपभोक्ताओं को राहत देने का दावा कर रही है, वहीं गाजियाबाद में बिजली उपभोक्ताओं की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। हालात यह हैं कि हर महीने करीब 2 हजार उपभोक्ताओं को गलत बिजली बिल थमा दिए जा रहे हैं। बीते चार महीनों में ही 9 हजार से अधिक गलत बिल जारी हो चुके हैं, जिन्हें ठीक कराने के लिए लोग लगातार विद्युत निगम के कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
मीटर रीडिंग में गड़बड़ी, ज्यादा खपत दिखाकर थमाए जा रहे बिल
शहर में करीब ढाई लाख से अधिक बिजली उपभोक्ता हैं। हर महीने 7 से 22 तारीख के बीच बिजली बिल जारी किए जाते हैं। उपभोक्ताओं का आरोप है कि मीटर रीडर बिल बनाते समय कभी कम तो कभी वास्तविक खपत से कहीं अधिक रीडिंग दर्ज कर देते हैं।
ज्यादा रीडिंग दर्ज होते ही उसी महीने भारी भरकम बिजली बिल आ जाता है। शिकायत करने पर भी मामलों को टाल दिया जाता है, जिससे परेशान होकर कई उपभोक्ता एमडी कार्यालय तक शिकायत पहुंचा रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, बीते एक साल में 20 हजार से अधिक गलत बिजली बिल सामने आ चुके हैं।
इन इलाकों में सबसे ज्यादा शिकायतें
प्रताप विहार, नवयुग मार्केट, मानसरोवर पार्क, भाटिया मोड़, शंकर विहार, पंचवटी कॉलोनी, पंचकुला कॉलोनी, चिपियाना बुजुर्ग, इस्लाम नगर, नई बस्ती, घंटाघर, कवि नगर और शास्त्री नगर समेत कई इलाकों के हजारों उपभोक्ताओं को इस महीने भी गलत बिजली बिल मिले हैं।
हालांकि कुछ मामलों में बिल रिवाइज कर दिए गए हैं, लेकिन बड़ी संख्या में उपभोक्ता अब भी समाधान के लिए निगम दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।
5 हजार रुपये से ज्यादा पेनल्टी से परेशान उपभोक्ता
भाटिया मोड़ निवासी अरुण कुमार, जो ई-चार्जिंग स्टेशन चलाते हैं, ने बताया कि उनके यहां 25 किलोवाट का कनेक्शन है। बीते पांच महीनों से उनके बिल में हर महीने 5 हजार रुपये से अधिक की पेनल्टी जोड़ी जा रही है।
इसके अलावा उनका एक 5 किलोवाट का कमर्शियल मीटर पिछले तीन महीनों से बंद है। पहले जहां 2500 रुपये का बिल आता था, वहीं शिकायत करने पर बिल बढ़कर 10 हजार रुपये तक पहुंच गया।
स्मार्ट मीटर लगा, बिल 80 हजार के पार पहुंचा
सिद्धार्थ विहार निवासी सचिन कुमार ने बताया कि उनके यहां 2 किलोवाट का कमर्शियल मीटर है, जिसका सामान्य बिल 2 से 2.5 हजार रुपये के बीच आता था। उन्होंने लगातार 10 महीने तक समय पर बिल जमा किया।
लेकिन स्मार्ट मीटर लगने के बाद उनका बिजली बिल सीधा 80 हजार 500 रुपये आ गया। उन्होंने ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज कराई, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
विद्युत निगम का पक्ष
इस मामले में विद्युत निगम के अधीक्षण अभियंता अनिल कुमार का कहना है कि कुछ उपभोक्ताओं से गलत बिल मिलने की शिकायत प्राप्त हुई है। उनके बिलों को रिवाइज किया जा रहा है।