
सिद्धार्थनगर।
भगवान बुद्ध की आध्यात्मिक भूमि सिद्धार्थनगर अब केवल अपनी ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान के लिए ही नहीं, बल्कि काला नमक चावल के कारण देश-दुनिया में अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा है। लगभग 2600 वर्ष पुराना इतिहास समेटे यह अनोखा चावल आज उत्तर प्रदेश सरकार की ‘एक जनपद–एक उत्पाद’ (ODOP) योजना के जरिए किसानों की समृद्धि और जिले की आर्थिक मजबूती का प्रतीक बन गया है।
हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सिद्धार्थनगर में 1000 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का शुभारंभ किया। इस अवसर पर काला नमक चावल को जिले की सांस्कृतिक विरासत और आर्थिक उन्नति का प्रमुख आधार बताया गया।
600 ईसा पूर्व से पिपरहवा में हो रही खेती
काला नमक चावल का इतिहास 600 ईसा पूर्व तक जाता है। सिद्धार्थनगर के पिपरहवा क्षेत्र में इसकी खेती सदियों से होती आ रही है। मान्यता है कि ज्ञान प्राप्ति के बाद जब महात्मा बुद्ध कपिलवस्तु लौटे, तो उन्होंने यहां के ग्रामीणों को आशीर्वाद स्वरूप काली भूसी वाले धान के दाने दिए थे।
कहा जाता है कि बुद्ध ने इसकी विशिष्ट सुगंध को अपनी स्मृतियों से जोड़ते हुए कहा था कि इसकी खुशबू सदैव उन्हें याद दिलाती रहेगी। तभी से यह चावल धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बन गया।
सुगंध, स्वाद और औषधीय गुणों से बनी खास पहचान
काला नमक चावल अपनी मोहक सुगंध, स्वाद और औषधीय गुणों के लिए प्रसिद्ध है। पकने के बाद भी इसकी खुशबू लंबे समय तक बनी रहती है। इसमें आयरन, जिंक और अन्य पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जिससे यह स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है।
इन्हीं कारणों से इसे आज भी भगवान बुद्ध के प्रसाद के रूप में पूजा जाता है और आधुनिक समय में यह स्वास्थ्य के प्रति जागरूक उपभोक्ताओं की पहली पसंद बनता जा रहा है।
ODOP योजना से बदली किसानों की तकदीर
उत्तर प्रदेश सरकार की ODOP योजना ने काला नमक चावल को नई उड़ान दी है। योजना के तहत किसानों को उन्नत बीज, आधुनिक कृषि तकनीक, प्रशिक्षण, पैकेजिंग और ब्रांडिंग का सहयोग मिला।
परिणामस्वरूप जहां पहले इसकी खेती का क्षेत्र 2642 हेक्टेयर तक सीमित था, वहीं आज यह बढ़कर 18,000 हेक्टेयर तक पहुंच चुका है। इससे न केवल उत्पादन बढ़ा है, बल्कि किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि भी हुई है।
सिंगापुर और थाईलैंड तक पहुंचा यूपी का चावल
अब काला नमक चावल स्थानीय या राष्ट्रीय बाजार तक सीमित नहीं रहा। इसकी खुशबू और पोषण मूल्य ने इसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी पहचान दिलाई है।
आज इसका निर्यात सिंगापुर और थाईलैंड जैसे देशों में हो रहा है, जिससे सिद्धार्थनगर के किसानों को बेहतर मूल्य मिल रहा है और जिले का नाम वैश्विक स्तर पर रोशन हो रहा है।
राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित जिला प्रशासन
काला नमक चावल के संरक्षण, विकास और प्रचार-प्रसार के लिए सिद्धार्थनगर जिला प्रशासन को कई राष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाजा गया है। इनमें
- प्रधानमंत्री पुरस्कार 2021
- स्कॉच अवार्ड 2022 (गोल्ड)
- राष्ट्रीय वन डिस्ट्रिक्ट–वन प्रोडक्ट अवार्ड 2024
शामिल हैं।