
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि राज्यों ने आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए उठाए गए कदम अपर्याप्त और दिखावटी हैं। कोर्ट ने एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) नियमों का पालन न करने वाले राज्यों की रिपोर्टों को फर्जी आंकड़ों से भरा और आंखों में धूल झोंकने वाला बताया।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एन वी अंजारिया की पीठ ने विशेष रूप से झारखंड सरकार के हलफनामे की आलोचना की, जिसमें दावा किया गया था कि केवल दो महीनों में लगभग 1.9 लाख कुत्तों का टीकाकरण और नसबंदी की गई। कोर्ट ने कहा कि इतने कम समय में इतने बड़े पैमाने पर यह संभव नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 7 नवंबर को निर्देश जारी किया था कि स्कूल, अस्पताल, खेल परिसर, बस स्टैंड/डिपो और रेलवे स्टेशनों जैसे सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाया जाए। साथ ही, इन जगहों पर कुत्तों के काटने की घटनाओं को रोकने के लिए ABC नियमों के तहत कुत्तों का टीकाकरण और नसबंदी की जानी चाहिए।
कोर्ट ने बताया कि राज्यों की ओर से दिए गए हलफनामों में आवारा कुत्तों की संख्या, डॉग पाउंड, ABC सेंटर और मानव संसाधन जैसे महत्वपूर्ण आंकड़े गायब थे। असम के हालात का उदाहरण देते हुए कोर्ट ने कहा कि 2024 में राज्य में 1.66 लाख कुत्तों के काटने के मामले सामने आए, जबकि वहां केवल एक ही डॉग सेंटर है।
सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी कि सभी राज्यों को गंभीरता से ABC नियमों का पालन करना होगा और जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी। ढीले रवैये वाले राज्यों के खिलाफ कड़े कदम उठाए जाने की संभावना जताई गई है।