Thursday, January 29

महाभारत का हवाला देते हुए पटना हाई कोर्ट ने बरकरार रखी फांसी, रोहतास ट्रिपल मर्डर मामला

पटना हाई कोर्ट ने भूमि विवाद में हुए निर्मम ट्रिपल मर्डर मामले में निचली अदालत द्वारा दी गई फांसी की सजा को बरकरार रखा है। न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद और सौरेंद्र पांडे ने अपने फैसले में महाभारत का हवाला देते हुए कहा कि यह अपराध दुर्लभतम श्रेणी में आता है और दोषियों को उनके पाप/अपराध के अनुसार दंडित किया जाना चाहिए।

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मामले का संक्षिप्त विवरण
रोहतास जिले के खुदराव गांव में लंबे समय से चले आ रहे पारिवारिक भूमि विवाद ने 13 जुलाई 2021 को एक भयानक रूप लिया। आरोपियों अमन सिंह और सोनल सिंह ने विजय सिंह और उनके बेटों दीपक सिंह और राकेश सिंह पर तलवारों और लाठियों से हमला किया। घायल पीड़ितों को चिकित्सा सहायता मिलने से पहले ही उनकी मृत्यु हो गई। इस घटना ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया।

निचली अदालत और हाई कोर्ट का रुख
निचली अदालत ने 2 मई 2024 को अमन सिंह और सोनल सिंह को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई। पटना हाई कोर्ट ने इस फैसले की पुष्टि करते हुए अपराध की गंभीरता और पीड़ित परिवार पर पड़े अमिट नुकसान को ध्यान में रखते हुए कहा कि आजीवन कारावास या अन्य विशेष सजा इस मामले में अपर्याप्त होगी।

महाभारत से न्यायशास्त्र का उदाहरण
न्यायमूर्ति ने कहा, “महाभारत में चचेरे भाइयों के बीच भूमि और सत्ता को लेकर हुए संघर्ष और विनाश की कहानी हमें यह सिखाती है कि अपने ही रिश्तेदारों की हत्या के अपराध का परिणाम घातक होता है। इस दुर्लभतम अपराध में दोषियों के लिए मृत्युदंड ही उचित दंड है।”

दोषियों द्वारा प्रस्तुत तर्क और राज्य का जवाब
अपील में दोषियों के अधिवक्ताओं ने एफआईआर दर्ज करने में देरी, गवाहों के बयानों में विरोधाभास और भूमि विवाद के स्वामित्व की जांच न होने का हवाला दिया। लेकिन अतिरिक्त लोक अभियोजक मनीष कुमार ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि जांच और प्रत्यक्ष साक्ष्य पर्याप्त हैं और अपराध की गंभीरता को देखते हुए मृत्युदंड ही न्यायसंगत है।

कोर्ट का निष्कर्ष
पटना हाई कोर्ट ने अपील खारिज करते हुए निचली अदालत द्वारा सुनाई गई फांसी की सजा को कायम रखा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि निजी प्रतिशोध और भूमि विवाद को लेकर ऐसे गंभीर अपराध को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

 

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