
भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हाल ही में हुई ऐतिहासिक डील देश को 2030 तक टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में वैश्विक शक्ति बनाने की दिशा में अहम साबित होगी। इस डील में सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम कंप्यूटिंग और 6G जैसी अत्याधुनिक तकनीकों पर काम करने का रोडमैप तय किया गया है।
‘Towards 2030’ नामक यह एजेंडा सिर्फ एक समझौता नहीं, बल्कि भारत को दुनिया का टेक हब बनाने का ब्लूप्रिंट है। इस डील से भारत न केवल डिजिटल इनोवेशन और सुरक्षा में आगे बढ़ेगा, बल्कि मेड-इन-इंडिया तकनीक और रोजगार के नए अवसर भी वैश्विक स्तर पर स्थापित होंगे।
डिजिटल ताकत में भारत का वर्चस्व
डील के तहत भारत और यूरोप मिलकर सेमीकंडक्टर, AI, क्वांटम कंप्यूटिंग और 6G पर काम करेंगे। खास बात यह है कि भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर यूरोप भी अपनाएगा। इससे एक सुरक्षित डिजिटल इकोसिस्टम बनेगा, जो साइबर खतरों से सुरक्षित होने के साथ ही भारत की चिप्स और टेलीकॉम टेक्नोलॉजी को वैश्विक मान्यता दिलाएगा।
अमेरिका और चीन को संकेत
इस समझौते से भारत ने अमेरिका को ठेंगा दिखाने के साथ-साथ चीन को भी टक्कर देने की तैयारी कर ली है। सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर दोनों में आत्मनिर्भर बनने के लिए यह कदम अहम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूरोपीय नेताओं के साथ मिलकर आर्थिक सुरक्षा और सप्लाई चेन मजबूत करने पर जोर दिया है। इसके परिणामस्वरूप भविष्य में आवश्यक तकनीक और सामान के लिए भारत चीन पर निर्भर नहीं रहेगा।
साथ ही, यूरोप और भारत रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में सहयोग करके ऐसी टेक्नोलॉजी विकसित करेंगे जो देश और डेटा दोनों को पूरी तरह सुरक्षित रखेगी। इस तरह भारत अपनी सैन्य और तकनीकी ताकत को यूरोप के एडवांस रिसोर्सेज से जोड़ पाएगा।
युवाओं के लिए नए अवसर
इस डील से सिर्फ सरकारें ही नहीं, बल्कि आम लोगों और युवाओं को भी लाभ होगा। स्किलिंग और ग्लोबल मोबिलिटी पर ध्यान देने के कारण भारतीय प्रोफेशनल्स अब यूरोप में काम, पढ़ाई और बिजनेस करने के नए अवसर प्राप्त कर पाएंगे। अगले साल ब्रुसेल्स में होने वाली ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल (TTC) की बैठक भारत और यूरोप की दोस्ती और तकनीकी सहयोग को और मजबूत करेगी।
इस डील से साफ है कि भारत 2030 तक टेक्नोलॉजी में दुनिया के बड़े खिलाड़ियों के सामने अपनी ताकत साबित करने की दिशा में कदम बढ़ा चुका है।