
मसूरी नगर पालिका ने ठेका प्रथा में काम कर रहे सफाई कर्मचारियों के लिए ऐतिहासिक फैसला लिया है। अब पालिका क्षेत्र के सभी ठेका कर्मचारियों को सरकार द्वारा निर्धारित वेतनमान के अनुसार पूरी सैलरी दी जाएगी।
पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी ने बैठक में स्पष्ट किया कि कर्मचारियों के साथ किसी भी प्रकार का शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और समान कार्य के लिए सभी को समान वेतन मिलेगा। उन्होंने कहा कि पूर्व पालिका बोर्ड के कार्यकाल में कर्मचारियों को केवल ₹8,000 प्रतिमाह वेतन दिया जाता था, जबकि सरकार द्वारा निर्धारित मानदेय ₹500 प्रतिदिन था। इस दौरान कर्मचारियों के आर्थिक शोषण की घटनाएं सामने आईं।
नए ठेके के नियम
1 जनवरी से ‘लॉर्ड शिवा कंपनी’ को डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने का ठेका दिया गया है। इस ठेके में स्पष्ट शर्त रखी गई है कि कंपनी के अंतर्गत कार्यरत सभी कर्मचारियों को सरकार द्वारा निर्धारित वेतन और सुविधाएं अनिवार्य रूप से दी जाएंगी।
मीरा सकलानी ने पूर्व पालिका अध्यक्ष अनुज गुप्ता पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में कुछ कर्मचारियों को बिना काम किए वेतन दिया गया और कुछ पर अत्यधिक कार्य का बोझ डाला गया। उन्होंने कहा कि उनके पास इसके पुख्ता प्रमाण मौजूद हैं और हर कर्मचारी को उसके कार्य के अनुरूप सैलरी दी जाएगी।
इनाम और सम्मान
पालिका अध्यक्ष ने यह भी घोषणा की कि स्वच्छता सर्वेक्षण में सरकार द्वारा मिले ₹25 लाख के पुरस्कार में से ₹12.50 लाख की राशि सफाई कर्मचारियों को इनाम स्वरूप वितरित की जाएगी। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारी नगर पालिका की रीढ़ हैं और मसूरी की स्वच्छता इन्हीं के कंधों पर टिकी है, इसलिए उनकी सुख-सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा जाएगा।
अखिल भारतीय सफाई मजदूर संघ के उत्तराखंड प्रभारी विशाल बिरला ने कहा कि पूर्व बोर्ड द्वारा किए गए अन्याय और शोषण पर अब विराम लग चुका है। उन्होंने बताया कि वेतन, ईएसआई और पीएफ में हुई गड़बड़ियों की भरपाई के लिए जल्द ही न्यायालय की शरण ली जाएगी।