
उत्तराखंड में लंबे समय से चले आ रहे सूखे के बाद प्रकृति ने अचानक मेहरबानी दिखाई है। बारिश और बर्फबारी ने प्रदेश को न केवल हरा-भरा बनाया है, बल्कि केदारनाथ धाम को भी बर्फ की चादर से ढककर अलौकिक रूप दे दिया है।
केदारनाथ धाम में दो दिन से लगातार हो रही बर्फबारी के चलते तापमान -16 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में बर्फ की मोटाई 3 से 4 फीट तक पहुंच चुकी है। दृश्य इतने दिव्य और भव्य हैं कि मानो प्रकृति ने बाबा केदारनाथ धाम का भव्य श्रृंगार स्वयं किया हो।
अत्यंत कठिन परिस्थितियों के बावजूद भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) और रुद्रप्रयाग पुलिस के जवान पूरी मुस्तैदी के साथ धाम की सुरक्षा में तैनात हैं। कड़ाके की ठंड, तेज बर्फीली हवाओं और भारी हिमपात के बीच जवान मंदिर परिसर और संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार गश्त कर रहे हैं।
हाल ही में 26 जनवरी के अवसर पर हिमवीरों ने भारी बर्फबारी के बीच तिरंगा फहराकर देशभक्ति का अद्भुत संदेश भी दिया था। मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद होने के बाद भी सुरक्षा बल मास्टर प्लान के तहत जारी कार्यों और सरकारी संपत्तियों की निगरानी पूरी निष्ठा से कर रहे हैं।
मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनी और हिमस्खलन की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने जवानों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन का कहना है कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद सुरक्षा बलों का मनोबल ऊंचा है और केदारनाथ धाम की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चाक-चौबंद है।
उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) ने ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी और हिमस्खलन की चेतावनी जारी करते हुए सभी जिलों को सतर्क किया है। रक्षा भू-सूचना अनुसंधान संस्थान (DGRE) के अनुसार, उत्तरकाशी, चमोली और रुद्रप्रयाग जिलों को नारंगी श्रेणी में रखा गया है, जबकि पिथौरागढ़ को पीली और बागेश्वर को हरी श्रेणी में रखा गया है। प्रशासन ने लोगों और यात्रियों से अपील की है कि वे मौसम की चेतावनियों को गंभीरता से लें और अनावश्यक जोखिम से बचें।