
कुरुक्षेत्र: हरियाणा के कुरुक्षेत्र में कांग्रेस के नए जिला अध्यक्षों के लिए आयोजित प्रशिक्षण शिविर में राहुल गांधी ने राजनीति को मार्शल आर्ट और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से जोड़कर एक अनोखा संदेश दिया। इस दौरान उन्होंने मंच पर मार्शल आर्ट की पोशाक में प्रवेश किया और पेशेवर प्रशिक्षक के साथ जिउ-जित्सु तकनीकों का प्रदर्शन किया। यह कार्यक्रम 21 जनवरी को आयोजित किया गया, जब राहुल गांधी विशेष विमान से अंबाला एयरस्ट्रिप पहुंचे और 10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के अंतिम चरण में शामिल हुए।
हैरानी में डूबे कांग्रेसी
शिविर में उपस्थित कांग्रेस नेताओं के अनुसार, राहुल गांधी ने मुकाबले के दौरान खुद को बार-बार गिराने और उठाने का अभ्यास कराया। उन्होंने इसे राजनीति में रणनीति, धैर्य और साहस के प्रतीक के रूप में समझाया। राहुल गांधी ने कहा कि जैसे मार्शल आर्ट में चतुराई और संतुलन जरूरी होता है, वैसे ही राजनीति में भी विरोधी से मुकाबले में इन गुणों की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि विपक्ष से निपटने में टकराव से बचते हुए संतुलन बनाए रखना और विरोधी को थकाना जरूरी है।
भगवान शिव और आध्यात्मिक शिक्षा
राहुल गांधी ने कुरुक्षेत्र की धार्मिक पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए हिंदू दर्शन और भगवान शिव के प्रतीकों की बात भी की। उन्होंने जिला अध्यक्षों को बताया कि भगवान शिव का माथे पर तिलक शरीर, आत्मा और मन का प्रतीक है और यह हमें सिखाता है कि केंद्रित, मजबूत और निडर कैसे रहा जाए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक संघर्ष में भी इसी तरह के दृष्टिकोण और आत्मविश्वास की जरूरत होती है।
शिविर में उपस्थित जिला अध्यक्षों ने राहुल गांधी के इस अनोखे अंदाज को देख कर अपनी हैरानी और प्रेरणा दोनों व्यक्त की। उनके अनुसार, यह अनुभव न केवल प्रशिक्षण बल्कि राजनीति में रणनीतिक सोच और साहस विकसित करने का भी मार्गदर्शन था।