
नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा सचिवालय ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व विधानसभाध्यक्ष रामनिवास गोयल को ‘फांसीघर’ मामले में पत्र लिखकर जवाब मांगा है। यह कदम विशेषाधिकार समिति की रिपोर्ट के बाद उठाया गया है, जिसमें कहा गया है कि केजरीवाल, गोयल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और पूर्व उपाध्यक्ष राखी बिड़लान ने समिति के समक्ष जानबूझकर उपस्थित न होकर सदन की अवमानना की है।
इस विवाद का जन्म 2022 में हुआ था, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री केजरीवाल ने ब्रिटिश काल की दिल्ली विधानसभा की इमारत के एक कमरे का उद्घाटन करते हुए उसे ‘फांसीघर’ बताया था। भाजपा ने पिछले साल सत्ता में आने के बाद इस मुद्दे को विधानसभा में उठाया और दावा किया कि जिस कमरे को ‘फांसीघर’ कहा गया, वह वास्तव में भोजन वितरण के लिए इस्तेमाल होने वाला ‘टिफिन रूम’ था।
भाजपा ने केजरीवाल से माफी की मांग की है और आरोप लगाया है कि पूर्व ‘आप’ सरकार ने जनता को गुमराह किया। मामले की जांच विशेषाधिकार समिति को सौंपा गया था, जिसने 6 जनवरी 2026 को अपनी रिपोर्ट विधानसभा में प्रस्तुत की।
सदन ने इस रिपोर्ट के आधार पर एक प्रस्ताव भी मंजूर किया है, जिसमें केजरीवाल और अन्य ‘आप’ नेताओं को समिति के समक्ष उपस्थित होकर 13 और 20 नवंबर 2025 की सुनवाई में अपनी अनुपस्थिति पर स्पष्टीकरण देने तथा ‘फांसीघर’ दावे से संबंधित सभी दस्तावेज और जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। इसके साथ ही विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता को विशेषाधिकार समिति के समक्ष ‘आप’ नेताओं की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कार्रवाई का अधिकार भी दिया गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह पत्र केजरीवाल और उनके सहयोगियों के लिए राजनीतिक और विधायी रूप से गंभीर चुनौती साबित हो सकता है, क्योंकि सदन ने स्पष्ट कर दिया है कि समिति के समक्ष अनुपस्थिति को सदन की अवमानना माना जाएगा।