
कई महिलाएं खांसते या छींकते समय अनजाने में पेशाब निकल जाने की समस्या से जूझती हैं। यह स्थिति न केवल शारीरिक असहजता पैदा करती है, बल्कि मानसिक तनाव और शर्मिंदगी का कारण भी बनती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह समस्या खासतौर पर 40 वर्ष की उम्र के बाद अधिक देखने को मिलती है।
गाइनेकोलॉजिस्ट डॉ. शैफाली दधीचि के मुताबिक, इस परेशानी का मुख्य कारण महिलाओं की पेल्विक फ्लोर मसल्स का कमजोर होना है। पेल्विक मसल्स गर्भाशय, मूत्राशय और मलाशय को सहारा देती हैं। उम्र बढ़ने के साथ ये मांसपेशियां ढीली पड़ने लगती हैं, जिससे शरीर का आंतरिक संतुलन बिगड़ जाता है और खांसने, छींकने या जोर लगाने पर यूरिन लीक होने लगता है। इस स्थिति को मेडिकल भाषा में स्ट्रेस यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस कहा जाता है।
डिलीवरी भी बनती है बड़ी वजह
डॉ. दधीचि बताती हैं कि बार-बार डिलीवरी होना भी इस समस्या का एक बड़ा कारण है। हर डिलीवरी के साथ पेल्विक मसल्स पर दबाव बढ़ता है और वे धीरे-धीरे कमजोर हो जाती हैं। इसके अलावा यदि डिलीवरी बहुत लंबी या कठिन रही हो, अस्पताल या प्रशिक्षित डॉक्टर की निगरानी में न हुई हो, या टांके व आवश्यक चिकित्सा सहायता न मिली हो, तो यह समस्या और गंभीर हो सकती है।
लापरवाही से बढ़ सकता है खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि सही पोषण की कमी, कैल्शियम और प्रोटीन का अभाव, भारी वजन उठाना और शारीरिक व्यायाम न करना भी पेल्विक मसल्स को कमजोर करता है, जिससे यूरिन लीकेज की आशंका बढ़ जाती है।
क्या हैं बचाव के उपाय
इस समस्या से बचाव और नियंत्रण के लिए महिलाओं को कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए—
संतुलित और पोषक आहार लें
प्रोटीन, कैल्शियम और मल्टीविटामिन का सेवन करें
नियमित रूप से कीगल एक्सरसाइज करें
वजन नियंत्रित रखें
समस्या अधिक बढ़ने पर डॉक्टर से परामर्श लेने में संकोच न करें
विशेषज्ञों का कहना है कि गंभीर मामलों में सर्जरी भी एक प्रभावी विकल्प हो सकता है, जिससे महिलाओं को इस परेशानी से स्थायी राहत मिल सकती है।
डॉक्टरों की सलाह है कि महिलाएं इस समस्या को शर्म या झिझक की वजह से नजरअंदाज न करें, बल्कि समय रहते सही इलाज कराएं, ताकि भविष्य में जटिलताओं से बचा जा सके।
नोट: किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या में स्वयं उपचार करने के बजाय विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।