Tuesday, January 27

शाहमीना शाह की मजार पर नोटिस की खबरों पर KGMU की सफाई, प्रवक्ता बोले—भ्रम फैलाने से बचें

लखनऊ: किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) परिसर में स्थित मजारों को लेकर जारी नोटिस के बाद उपजे विवाद पर अब विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट की है। KGMU के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने साफ शब्दों में कहा है कि शाहमीना शाह की मजार और हाजी हरमैन दरगाह को कोई नोटिस जारी नहीं किया गया है। उन्होंने इस संबंध में फैल रही अफवाहों को निराधार बताते हुए लोगों से भ्रम न फैलाने की अपील की।

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दरअसल, KGMU प्रशासन द्वारा परिसर में बनी कुछ मजारों को हटाने संबंधी नोटिस जारी किए जाने के बाद यह मामला राजनीतिक और धार्मिक बहस का विषय बन गया। समाजवादी पार्टी सहित कई मुस्लिम धर्मगुरुओं ने इस कार्रवाई पर नाराजगी जताई थी। इसी बीच KGMU का नाम बदलने की मांग भी उठने लगी।

प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने बताया कि केवल 4 से 5 मजारों को नोटिस भेजा गया है, जो पिछले 40 से 50 वर्षों के दौरान बनी हैं। प्रारंभ में ये संरचनाएं छोटी थीं, लेकिन समय के साथ इनका दायरा बढ़ता गया। विश्वविद्यालय द्वारा कराए गए सर्वे के आधार पर यह कार्रवाई की गई है, जो लंबे समय से प्रक्रियाधीन थी।

उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल केवल नोटिस जारी किए गए हैं और संबंधित पक्षों को 15 दिनों के भीतर जवाब देने का अवसर दिया गया है। प्राप्त जवाबों के बाद कानूनी सलाह लेकर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित लोगों को व्यक्तिगत सुनवाई का मौका भी दिया जाएगा।

KGMU का नाम बदलने की मांग पर प्रवक्ता ने कहा कि यह विश्वविद्यालय प्रशासन का विषय नहीं है। KGMU एक राज्य विश्वविद्यालय है और इसके नाम में बदलाव का निर्णय सरकार और विधानसभा के स्तर पर ही लिया जा सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नाम बदलने से विश्वविद्यालय की संपत्तियों, उनके स्वरूप या मालिकाना हक पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

प्रवक्ता ने दोहराया कि जिन मजारों को नोटिस दिया गया है, उन्हें पर्याप्त समय और कानूनी अवसर प्रदान किया गया है, इसलिए इस मुद्दे पर अनावश्यक भ्रम फैलाने से बचा जाना चाहिए।

गौरतलब है कि शाहमीना शाह मस्जिद और मजार का ऐतिहासिक महत्व है। बताया जाता है कि यह मस्जिद करीब 655 वर्ष पुरानी है और नवाबी दौर से भी पहले की मानी जाती है। मखदूम शाहमीना शाह (र.अ.) की मजार यहां स्थित है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु मन्नतों और दुआओं के साथ जियारत के लिए आते हैं। मस्जिद की स्थापत्य कला में मुगलकालीन कारीगरी की झलक आज भी देखी जा सकती है।

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