Thursday, May 14

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नेताजी सुभाष चंद्र बोस को अंतिम बार देखा गया गोमो में 1941 का इतिहास फिर जीवंत होगा

 

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धनवाद, 23 जनवरी 2026: देशभर में आज नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती “पराक्रम दिवस” के रूप में बड़े उत्साह और भव्यता के साथ मनाई जा रही है। इस अवसर पर भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने देश के 13 ऐतिहासिक स्थलों का चयन किया है, जिनका नेताजी के जीवन और स्वतंत्रता संग्राम से गहरा नाता है। झारखंड के गोमो और रामगढ़ विशेष रूप से शामिल हैं।

 

गोमो: नेताजी के साहस का प्रतीक

गोमो रेलवे स्टेशन (अब नेताजी सुभाष चंद्र बोस जंक्शन) केवल एक यात्री स्टेशन नहीं, बल्कि नेताजी के अदम्य साहस और “ग्रेट एस्केप” का साक्षी है। 18 जनवरी 1941 की रात को नेताजी ने यहीं से अंग्रेजी हुकूमत की आंखों में धूल झोंकते हुए पेशावर के लिए अपनी यात्रा शुरू की थी। यही वह स्थान है जहाँ उन्हें भारत की धरती पर अंतिम बार देखा गया। गोमो से नेताजी पेशावर और फिर रेंगुन पहुंचे, उसके बाद उनका रास्ता गुमनामी में विलीन हो गया।

 

18 जनवरी 1941 का घटनाक्रम

इतिहास के अनुसार, नेताजी अपने भतीजे डॉ. शिशिर बोस के साथ ऑस्ट्रेलियन कार (BLA-7169) में कलकत्ता से निकलकर तोपचांची होते हुए गोमो पहुंचे। वहां उन्होंने हटियाटाड़ के जंगलों में स्वतंत्रता सेनानियों के साथ गुप्त बैठक की और रात को लोको बाजार स्थित बस्ती में छिपकर बिताई। यह पूरी योजना अत्यंत गोपनीय रखी गई थी, ताकि ब्रिटिश जासूस उन्हें पहचान न सकें।

 

एएसआई के माध्यम से युवाओं को प्रेरणा

गोमो में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। एएसआई के सहायक पुरातत्वविद नीरज मिश्रा ने बताया कि गोमो और रामगढ़ में सांस्कृतिक और शैक्षणिक गतिविधियों के माध्यम से नई पीढ़ी को नेताजी के साहस और स्वतंत्रता संग्राम के संघर्षों से रूबरू कराया जाएगा।

 

विशेष आयोजन:

देश के 13 ऐतिहासिक स्थलों पर एक साथ कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे नेताजी के योगदान और उनके अदम्य साहस की स्मृति युवाओं के मन में जीवित रहे।

 

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