Thursday, January 22

26 जनवरी को रचा जाएगा इतिहास, पहली बार CRPF कंटिंजेंट का नेतृत्व करेंगी महिला असिस्टेंट कमांडेंट

नई दिल्ली।
इस वर्ष गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ एक ऐतिहासिक पल का साक्षी बनेगा। पहली बार केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) की एक महिला अधिकारी गणतंत्र दिवस परेड में कंटिंजेंट का नेतृत्व करेंगी। असिस्टेंट कमांडेंट सिमरन बाला 26 जनवरी को CRPF कंटिंजेंट की कमान संभालकर न केवल बल का बल्कि देश का भी गौरव बढ़ाएंगी। यह उपलब्धि न केवल CRPF, बल्कि BSF, ITBP, CISF, असम राइफल्स समेत समूचे केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) के इतिहास में पहली बार दर्ज होगी।

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परिवार की तीसरी पीढ़ी देश सेवा में

नवभारत टाइम्स से विशेष बातचीत में असिस्टेंट कमांडेंट सिमरन बाला ने बताया कि वह अपने परिवार की तीसरी पीढ़ी हैं, जो वर्दी पहनकर देश की सेवा कर रही हैं। उनके दादा तीरथ राम चौधरी भारतीय सेना में सूबेदार रहे, जबकि पिता विनोद कुमार चौधरी सेना से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। परिवार की इस सैन्य विरासत ने ही उन्हें बचपन से वर्दी पहनने के लिए प्रेरित किया।

सीमा क्षेत्र में बीता बचपन, वहीं जन्मा जज़्बा

सिमरन बाला जम्मू-कश्मीर के नौशेरा क्षेत्र की रहने वाली हैं, जो पाकिस्तान सीमा से मात्र करीब 10 किलोमीटर दूर स्थित है। सीमावर्ती इलाके में गोलाबारी और तनावपूर्ण हालात के बीच उनका बचपन बीता। दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब देने और देश की रक्षा में योगदान देने का संकल्प उन्होंने वहीं से लिया।

पहले ही प्रयास में UPSC CAPF परीक्षा में सफलता

अपने सपने को साकार करने के लिए सिमरन बाला ने वर्ष 2021 में UPSC की CAPF परीक्षा दी और पहले ही प्रयास में AIR-82 रैंक हासिल की। जनवरी 2024 में उन्होंने CRPF जॉइन किया और 6 मार्च 2025 को ट्रेनिंग पूरी कर पास आउट हुईं। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए तीन में से दो बेस्ट ट्रॉफी अपने नाम कीं।

नक्सल मोर्चे पर भी निभा रहीं अहम भूमिका

उनकी पहली पोस्टिंग छत्तीसगढ़ में CRPF की बस्तरिया बटालियन में हुई, जहां वह नक्सल विरोधी अभियानों में सक्रिय रूप से भाग ले रही हैं। उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ पर CRPF कंटिंजेंट की पहली महिला कमांडर बनना उनके लिए गर्व का क्षण है। इस ऐतिहासिक जिम्मेदारी के लिए उन्हें पूरे बल का भरपूर सहयोग मिल रहा है।

नारी शक्ति का सशक्त प्रतीक

असिस्टेंट कमांडेंट सिमरन बाला की यह उपलब्धि न केवल महिलाओं के बढ़ते सशक्तिकरण का प्रतीक है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि देश की सुरक्षा में महिलाएं कंधे से कंधा मिलाकर अग्रिम पंक्ति में खड़ी हैं।

 

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