
मऊ, 14 फरवरी 2026: मऊ के तमसा तट पर करोड़ों की लागत से बने महादेव मंदिर और घाट का भव्य लोकार्पण आज ऊर्जा और नगर विकास मंत्री एके शर्मा के द्वारा किया जाएगा। इस परियोजना से मऊ का धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन महत्व बढ़ने की उम्मीद है।
ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व
प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, महर्षि वाल्मीकि का आश्रम इसी तमसा तट पर स्थित था। कहा जाता है कि वन प्रवास के दौरान यहीं पर मां सीता ने लव और कुश को जन्म दिया था। मऊ के कहिनौर गांव में आज भी मां सीता को वनदेवी के रूप में पूजित किया जाता है। हजारों श्रद्धालु आज भी यहां मत्था टेकने आते हैं।
घाट और मंदिर की विशेषताएं
तमसा नदी के सुंदरीकरण और घाट निर्माण का काम CSR फंड से लगभग 9.38 करोड़ रुपये की लागत से किया गया। घाटों के निर्माण में राजस्थान के धौलपुर से लाल बलुआ पत्थर और बंशी पहाड़पुर से गुलाबी पत्थरों का उपयोग किया गया, जिनकी मजबूती और निखार समय के साथ और बढ़ता है।
मंदिर प्रांगण में 61 फीट ऊंची कंक्रीट से बनी महादेव की विशाल प्रतिमा और नक्काशीदार छतरियां इसे काशी और गोमती रिवर फ्रंट की याद दिलाती हैं। घाटों पर बैठने की व्यवस्था, शानदार लाइटिंग और सौंदर्यीकरण किया गया है। बच्चों के लिए चिल्ड्रेन पार्क भी बनाया गया है।
पर्यटन और सांस्कृतिक बढ़ावा
मंत्री एके शर्मा ने नवभारत टाइम्स से बातचीत में कहा कि इस परियोजना से मऊ में न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान मिलेगी, बल्कि पर्यटन को भी प्रोत्साहन मिलेगा। अब घाटों की खूबसूरती देखने के लिए लोगों को वाराणसी जाने की आवश्यकता नहीं होगी, मऊ ही इसका आकर्षक केंद्र बन जाएगा।
