Thursday, January 22

तैमारा घाटी का ‘टाइम ट्रैवल’ रहस्य: रांची की पहाड़ियों और पत्थरों में छिपा भविष्य का रास्ता

 

This slideshow requires JavaScript.

रांची। टाटा मार्ग पर स्थित तैमारा घाटी एक रहस्यमय स्थल के रूप में उभरकर सामने आ रही है। ऐसा प्रतीत होता है जैसे यह घाटी किसी ‘टाइम ट्रैवल’ कहानी की तरह काम कर रही हो। यह मामला 6 जनवरी 2026 का है, जब भूविज्ञानी डॉ. नितीश प्रियदर्शी के कॉलेज के छात्रों का दल शोध कार्य के लिए घाटी पहुंचा। जैसे ही छात्र घाटी के एक विशेष बिंदु पर पहुंचे, उनके मोबाइल फोन की घड़ी एक साल आगे बढ़कर 6 जनवरी 2027 दिखाने लगी।

 

वैज्ञानिक कारण: भू-चुंबकीय विसंगतियाँ

 

डॉ. नितीश प्रियदर्शी के अनुसार, घाटी की चट्टानें समय और दिशा को प्रभावित कर रही हैं। इस क्षेत्र में मैग्नेटाइट और ग्रेनाइट चट्टानों की मौजूदगी से एक स्थानीय चुंबकीय क्षेत्र बन जाता है, जो कंपास और स्मार्टफोन के सेंसर्स को भ्रमित कर सकता है। मोबाइल फोन का समय गलत दिखना तकनीकी रूप से तब होता है जब नेटवर्क टाइम प्रोटोकॉल (NTP) या GPS सिग्नल किसी बाहरी चुंबकीय हस्तक्षेप के कारण गलत डेटा रिसीव करता है।

 

विशेषज्ञों का कहना है कि इस घाटी के उस खास बिंदु को “ग्लिच पॉइंट” कहा जा रहा है। यहां की शक्तिशाली चुंबकीय चट्टानों से न केवल कंपास की दिशा बदलती है, बल्कि स्मार्टफोन के समय और स्थान संकेत भी विकृत हो जाते हैं।

 

इतिहास और रहस्य

 

तैमारा घाटी का इतिहास भी अद्भुत और रहस्यमय है। शिक्षक सुदीप श्रीवास्तव के अनुसार, सन 2019-21 के बीच इलाके में किए गए अध्ययन में पता चला कि महाभारत काल या उससे भी पहले इस क्षेत्र में तमरासुर नामक राक्षस का निवास स्थान था। घाटी के नीचे आज भी कुछ गुफाओं और जल कुंडों के अवशेष मौजूद हैं, जिनके बारे में स्थानीय लोग मानते हैं कि उनमें अद्भुत शक्तियाँ हैं और जल से अनेक रोगों का इलाज संभव है।

 

पर्यटन और वैज्ञानिक दृष्टि

 

भूविज्ञानी और इतिहासकार दोनों ही तैमारा घाटी को भौगोलिक और वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानते हैं। यह स्थल न केवल रहस्यमय अनुभव देता है, बल्कि शोधकर्ताओं के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

 

इस घाटी की अनोखी विशेषताएं और इतिहास इसे रांची के प्रमुख रहस्यमय स्थलों में से एक बनाती हैं, जहां प्रकृति और विज्ञान का अद्भुत मेल देखने को मिलता है।

 

 

Leave a Reply