
नई दिल्ली: भारत सरकार ने 6 गीगाहर्ट्ज (GHz) स्पेक्ट्रम बैंड के निचले हिस्से (5925-6425 मेगाहर्ट्ज) को बिना लाइसेंस के इस्तेमाल करने की मंजूरी दे दी है। इस फैसले से घरों में वाई-फाई की स्पीड में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होने की उम्मीद है और WiFi 6E एवं WiFi 7 राउटर्स अब बाजार में आसानी से उपलब्ध होंगे।
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बुधवार शाम इस मंजूरी पर मुहर लगाई। विशेषज्ञों के अनुसार, इस निर्णय से आम उपयोगकर्ताओं को हाई-स्पीड इंटरनेट का लाभ मिलेगा। वाई-फाई 6E और WiFi 7 राउटर्स लगाने से डाउनलोड और अपलोड दोनों की गति बढ़ेगी, जिससे ऑनलाइन गेमिंग, वीडियो स्ट्रीमिंग और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बिना लैग या हैंग हुए सुचारू रूप से संभव होंगे।
टेलिकॉम और टेक कंपनियों के बीच खींचतान:
6GHz स्पेक्ट्रम बैंड को लेकर लंबे समय से टेलिकॉम और टेक्नोलॉजी कंपनियों में विवाद चल रहा था। टेलिकॉम कंपनियां इस बैंड का इस्तेमाल 5G नेटवर्क को और बेहतर बनाने के लिए करना चाहती थीं, जबकि टेक कंपनियों का तर्क था कि इसका उपयोग घरों में हाई-स्पीड वाई-फाई के लिए होना चाहिए।
पिछले साल मई में दूरसंचार विभाग ने इस बैंड के 500 मेगाहर्ट्ज हिस्से को बिना लाइसेंस वाले इनडोर वाई-फाई के लिए खोलने का प्रस्ताव रखा था, जिसे तब टेलिकॉम कंपनियों ने अस्वीकार किया था। अब सरकार ने संतुलित फैसला लेते हुए इसे बिना लाइसेंस सभी के लिए उपलब्ध कर दिया है। इसका मतलब है कि 5G नेटवर्क अपग्रेड के साथ-साथ घरों में इंटरनेट स्पीड भी तेज होगी।
उपभोक्ताओं के लिए लाभ:
- हाई-स्पीड इंटरनेट के लिए वाई-फाई 6E और WiFi 7 राउटर्स इस्तेमाल किए जा सकेंगे।
- ऑनलाइन गेमिंग, स्ट्रीमिंग और वीडियो कॉलिंग बिना रुकावट के संभव होंगी।
- मोबाइल डेटा पर खर्च कम हो सकता है।
- लाइसेंस वाले स्पेक्ट्रम का उपयोग अन्य डिजिटल सेवाओं के लिए किया जा सकेगा।
इस फैसले से भारत में डिजिटल कनेक्टिविटी के स्तर को नई ऊँचाई मिलेगी और घरों में इंटरनेट अनुभव को और बेहतर बनाया जा सकेगा।