Friday, May 22

This slideshow requires JavaScript.

बिहार सरकार के 70 हजार करोड़ रुपये का हिसाब नहीं, पटना हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

 

This slideshow requires JavaScript.

 

पटना: बिहार सरकार के विभिन्न विभागों ने 70 हजार करोड़ रुपये के खर्च का सही-सही हिसाब नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) को नहीं दिया है। इस संबंध में 49,649 उपयोगिता प्रमाणपत्र (यूसी) लंबित हैं, जिससे राज्य की वित्तीय पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। पटना उच्च न्यायालय ने इस मामले में सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है।

 

हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू की बैंच ने किशोर कुमार की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि इतनी बड़ी संख्या में उपयोगिता प्रमाणपत्र जमा न होना वित्तीय अनुशासन का उल्लंघन है। अदालत ने सरकार को दो महीने में इस संबंध में विस्तृत जानकारी पेश करने के निर्देश दिए हैं।

 

याचिका में कहा गया है कि वित्तीय वर्ष 2016-17 से 2022-23 तक के करीब 70 हजार करोड़ रुपये का हिसाब सरकारी रिकॉर्ड में लंबित है। कैग की रिपोर्ट में भी इस अनियमितता पर चिंता जताई गई है।

 

याचिकाकर्ता ने सुझाव दिया है कि इस मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) या किसी अन्य स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए। इसके अलावा, हाईकोर्ट के मौजूदा या सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में एक विशेष जांच टीम गठित करने की मांग की गई है।

 

कैग की रिपोर्ट के अनुसार, बिहार ने 2023-24 में 14.47 प्रतिशत की विकास दर दर्ज की, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है। हालांकि, राज्य की कुल देनदारी 3,98,560.98 करोड़ रुपये तक बढ़ गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 12.34 प्रतिशत अधिक है। इसके बावजूद राज्य ने 15वें वित्त आयोग द्वारा निर्धारित लक्ष्यों को पूरा नहीं किया।

 

विशेषज्ञों के अनुसार उपयोगिता प्रमाणपत्र यह सुनिश्चित करते हैं कि सरकारी धन का उपयोग उसी काम में हुआ है जिसके लिए उसे आवंटित किया गया था। प्रमाणपत्र लंबित होने से यह स्पष्ट नहीं हो पाता कि राशि कहां खर्च हुई, जिससे वित्तीय नियंत्रण कमजोर होता है।

 

पटना हाईकोर्ट ने सरकार से कहा है कि दो महीने में जवाब पेश करें, जिसके बाद अदालत मामले पर अगली सुनवाई करेगी।

 

Leave a Reply