Monday, June 1

This slideshow requires JavaScript.

अरावली में अवैध खनन रोकने कमेटी गठित, सुप्रीम कोर्ट ने 4 हफ्ते में मांगे एक्सपर्ट के नाम

 

This slideshow requires JavaScript.

 

नई दिल्ली, 22 जनवरी: सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पर्वत में अवैध खनन से होने वाली अपूरणीय क्षति पर गंभीर चिंता जताई है। बुधवार को सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने इस मामले की व्यापक और समग्र जांच के लिए विशेषज्ञों की एक कमेटी बनाने का आदेश दिया। कोर्ट ने अडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी और कोर्ट सलाहकार के. परमेश्वर से कहा कि वे चार हफ्ते के भीतर ऐसे पर्यावरणविदों और वैज्ञानिकों के नाम सुझाएं, जो खनन के क्षेत्र में विशेषज्ञ हों।

 

कोर्ट के निर्देशन में करेगी काम

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह कमेटी केवल कोर्ट के निर्देश और कड़ी निगरानी में काम करेगी। कमेटी की जिम्मेदारी होगी कि वह पहाड़ियों के बीच 500 मीटर के अंतराल वाले इलाकों में नियंत्रित खनन की अनुमति के मानक तय करे, ताकि पर्यावरणीय संतुलन और प्राकृतिक निरंतरता प्रभावित न हो।

 

प्रदूषण नियंत्रण पर भी सख्त कदम

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दिल्ली सरकार, नगर निगम और NCR के राज्यों की एजेंसियों से पूछा कि प्रदूषण कब तक कम किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय प्रदूषण निगरानी संस्था (CAQM) के लॉन्ग-टर्म उपायों को लागू करने की कार्रवाई रिपोर्ट चार हफ्ते में पेश करने का आदेश दिया और कहा कि अब कोई आपत्ति स्वीकार नहीं की जाएगी।

 

अरावली विवाद की पृष्ठभूमि

सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवंबर के आदेश में 100 मीटर से छोटी पहाड़ियों पर खनन को अनुमति दी थी, जिससे पूरे देश में 100 मीटर की परिभाषा को लेकर विवाद खड़ा हो गया। अब कोर्ट ने इस विवाद के समाधान और अवैध खनन को रोकने के लिए विशेषज्ञ कमेटी गठन की दिशा में कदम उठाया है।

 

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला अरावली पर्वत और उसके पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा के लिए अहम माना जा रहा है।

 

 

Leave a Reply