Tuesday, January 20

वाराणसी में जलकर सरचार्ज पर ऐतिहासिक फैसला, 1.41 लाख गृहस्वामियों को बड़ी राहत

 

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वाराणसी नगर निगम ने शहरवासियों को बड़ी राहत देते हुए जलकर के बकाए सरचार्ज पर अहम निर्णय लिया है। इस फैसले के तहत आवासीय श्रेणी के 1,41,103 गृहस्वामियों को अब जलकर के बकाए पर कोई सरचार्ज नहीं देना होगा। हालांकि, इन सभी को 31 मार्च 2026 तक मूल बकाया राशि का भुगतान करना अनिवार्य होगा।

 

दरअसल, नगर निगम पर इन भवनों का कुल 72.02 करोड़ रुपये का सरचार्ज बकाया था। यह निर्णय सोमवार को टाउनहॉल स्थित गांधी भवन में आयोजित नगर निगम बोर्ड की बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता मेयर अशोक कुमार तिवारी ने की।

 

बैठक में धारा 91(2) के तहत पार्षद सुरेश कुमार चौरसिया ने जलकर के बकाए सरचार्ज की माफी का प्रस्ताव रखा, जिसे राजेश यादव ‘चल्लू’ ने समर्थन दिया। इस दौरान व्यावसायिक श्रेणी के भवनों पर भी सरचार्ज माफी की मांग उठी। प्रस्ताव पर चर्चा करते हुए सुरेश कुमार चौरसिया ने कहा कि जलकल विभाग हर साल एकमुश्त जमा समाधान योजना के तहत सरचार्ज में 100 फीसदी छूट देता रहा है, लेकिन पिछले दो वर्षों से यह सुविधा नहीं मिल रही थी। अंततः बोर्ड ने प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित कर दिया।

 

अन्य अहम मुद्दों पर भी हुई चर्चा

बैठक में नगर निगम क्षेत्र में चिह्नित कुओं की सफाई का मुद्दा भी उठा। पार्षद राजेश यादव ‘चल्लू’ ने इस संबंध में नगर निगम प्रशासन से जवाब मांगा, जिस पर मेयर ने चीफ इंजीनियर आर.के. सिंह से रिपोर्ट तलब की।

 

मदन मोहन दुबे ने डोर-टू-डोर कूड़ा उठान की कंपनी ‘वाराणसी वेस्ट सॉल्यूशन’ की कार्यशैली में सुधार न होने पर नाराजगी जताई। वहीं, हनुमान प्रसाद ने वर्ष 2023 से अब तक वार्डवार ट्यूबवेल संचालन की सूची पार्षदों को उपलब्ध कराने की मांग रखी।

 

अब नगर निगम करेगा स्ट्रीट लाइट की देखरेख

बैठक में धारा 9(1) के तहत स्ट्रीट लाइट मेंटनेंस से जुड़े प्रस्ताव पर नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने बताया कि ईईएसएल से हुआ समझौता समाप्त हो चुका है। अब निगम क्षेत्र में लगी 43,570 स्ट्रीट लाइटों की देखभाल स्वयं नगर निगम करेगा।

 

इसके अलावा, एक ही पटल पर लंबे समय से जमे बाबुओं के तबादले और अधिकारियों की विकास कार्यों के प्रति लापरवाही का मुद्दा भी उठा। मेयर ने इन सभी बिंदुओं पर गंभीरता से विचार करने और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया।

 

यह फैसला न सिर्फ हजारों परिवारों को आर्थिक राहत देगा, बल्कि नगर निगम और नागरिकों के बीच विश्वास को भी मजबूत करेगा।

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