
भोपाल (एमपी): बेंगलुरु के इंजीनियर से UPSC अधिकारी बने संदीप जी.आर., 2013 बैच के IAS अधिकारी हैं। उनका मानना है कि सरकारी योजनाओं की सार्थकता तभी है, जब वे कागजों में न रहकर जमीन पर प्रभावी रूप से लागू हों। सागर कलेक्टर के रूप में उनकी अनोखी कार्यशैली, ‘नमो फल वन’ अभियान और श्रद्धांजलि योजना उन्हें पूरे मध्य प्रदेश में चर्चा में ला रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी उनकी कार्यशैली के कायल हैं।
शिक्षा और करियर
संदीप जी.आर. ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद यूपीएससी परीक्षा पास कर IAS अधिकारी बनने का रास्ता चुना। उनकी पहली पोस्टिंग जबलपुर में सहायक कलेक्टर के रूप में हुई। इसके बाद वे सतना नगर निगम आयुक्त और जिला पंचायत के सीईओ रहे। छतरपुर और सागर में कलेक्टर के रूप में रहते हुए उन्होंने प्रशासन में नई मिसालें पेश की हैं।
जनहितकारी पहलें और नवाचार
रात की चौपालें और स्कूल विज़िट: ग्रामीण क्षेत्रों में रात की चौपाल लगवाकर लोगों की समस्याओं का निवारण। अचानक स्कूलों में जाकर बच्चों को पढ़ाना और व्यवस्थाओं का निरीक्षण।
पेड़ लगाने का अभियान: जबलपुर में 30,000 और छतरपुर में 40,000 फलदार पेड़ लगाए। सागर में ‘नमो फल वन’ अभियान के तहत 10 लाख पौधरोपण का लक्ष्य तय।
श्रद्धांजलि योजना: दिवंगत सरकारी कर्मचारियों के परिजनों को त्वरित अनुकंपा नियुक्ति। इस योजना की प्रशंसा मुख्यमंत्री ने भी की।
किसान और महिला सुरक्षा: भावांतर योजना में तेजी, फसल अवशेष जलाने पर सख्ती, कृषि शिकायतों का त्वरित समाधान।
युवाओं के लिए मॉडल टेस्ट और करियर मार्गदर्शन: ग्रामीण और शहरी विद्यार्थियों को समान अवसर प्रदान।
सार्वजनिक प्रशंसा और प्रभाव
संदीप जी.आर. की कार्यशैली ने उन्हें आमजन के बीच विशिष्ट पहचान दी है। उनके प्रशासनिक फैसले समयबद्ध और प्रभावी रहते हैं। किसान बीमा राशि में देरी के एक मामले में कोर्ट वारंट जारी होने के बावजूद उन्होंने तुरंत किसान के खाते में राशि पहुंचाकर यह संदेश दिया कि प्रशासन अब देरी नहीं, समाधान देगा।
संदीप जी.आर. की इन पहलों और नवाचारों ने उन्हें मध्य प्रदेश के प्रशासनिक क्षेत्र में एक सफल और जनप्रिय IAS अधिकारी के रूप में स्थापित किया है।