
नई दिल्ली।
भारतीय अर्थव्यवस्था एक और ऐतिहासिक उपलब्धि की ओर तेजी से बढ़ रही है। एसबीआई रिसर्च की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत वर्ष 2030 तक ‘अपर-मिडिल-इनकम’ यानी उच्च-मध्यम आय वाले देशों के समूह में शामिल हो जाएगा। इसके साथ ही भारत चीन और इंडोनेशिया जैसे देशों की कतार में खड़ा होगा। रिपोर्ट यह भी संकेत देती है कि भारत 2028 तक जर्मनी को पछाड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय (GNI) में लगातार हो रही बढ़ोतरी इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह है। अनुमान है कि 2030 तक भारत की प्रति व्यक्ति आय 4,000 डॉलर तक पहुंच जाएगी, जो उसे उच्च-मध्यम आय वर्ग में पहुंचाने के लिए पर्याप्त होगी।
कहां से कहां पहुंचा भारत
आजादी के बाद भारत को निम्न-मध्यम आय वर्ग से बाहर निकलने में करीब 60 साल लगे।
- 1962 में प्रति व्यक्ति आय: सिर्फ 90 डॉलर
- 2007 में: 910 डॉलर
- 2009 में: 1,000 डॉलर
- 2019 में: 2,000 डॉलर
- 2026 तक अनुमान: 3,000 डॉलर
यह आंकड़े दिखाते हैं कि बीते डेढ़ दशक में भारत की आर्थिक रफ्तार कितनी तेज रही है।
विश्व बैंक का आय वर्गीकरण
विश्व बैंक देशों को प्रति व्यक्ति जीएनआई के आधार पर चार श्रेणियों में बांटता है—
निम्न आय, निम्न-मध्यम आय, उच्च-मध्यम आय और उच्च आय।
1990 में जहां निम्न आय वाले देशों की संख्या 51 थी, वहीं 2024 में यह घटकर 26 रह गई है। इसके उलट, उच्च आय वाले देशों की संख्या 39 से बढ़कर 87 हो चुकी है। भारत भी अब इसी प्रगति पथ पर आगे बढ़ रहा है।
हाई-इनकम देश बनने की राह
रिपोर्ट के अनुसार, अगर भारत को 2047 तक उच्च-आय वाला देश बनना है, तो उसे अपनी प्रति व्यक्ति आय को सालाना करीब 7.5 फीसदी की चक्रवृद्धि दर से बढ़ाना होगा। अच्छी बात यह है कि 2001 से 2024 के बीच यह दर औसतन 8.3 फीसदी रही है।
हालांकि, अगर उस समय हाई-इनकम की सीमा बढ़कर 18,000 डॉलर हो जाती है, तो भारत को लगभग 8.9 फीसदी की वार्षिक वृद्धि दर बनाए रखनी होगी।
अर्थव्यवस्था का आकार भी बढ़ेगा
एसबीआई रिसर्च का अनुमान है कि भारत 2028 तक 5 लाख करोड़ डॉलर और 2035 तक 10 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की क्षमता रखता है।
जहां 1990 में भारत दुनिया की 14वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था, वहीं 2025 तक वह चौथे स्थान पर पहुंच चुका होगा और 2028 में तीसरे स्थान पर काबिज होने की पूरी संभावना है।
आगे की राह
रिपोर्ट में जोर दिया गया है कि इस विकास को बनाए रखने के लिए भारत को आर्थिक सुधारों की गति जारी रखनी होगी। मजबूत नीतियां, निवेश-अनुकूल माहौल और निरंतर ग्रोथ ही भारत को 2030 तक उच्च-मध्यम आय और 2047 तक उच्च-आय वाले देशों की श्रेणी में पहुंचा सकती हैं।
कुल मिलाकर, आंकड़े और अनुमान यही बताते हैं कि भारत न सिर्फ तेजी से आगे बढ़ रहा है, बल्कि वैश्विक आर्थिक मंच पर उसकी भूमिका पहले से कहीं ज्यादा मजबूत होने वाली है।