Monday, January 19

यूरोप की सबसे शक्तिशाली सेना बना रहा जर्मनी, भारत के ‘अग्निवीर’ मॉडल से प्रेरणा

 

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बर्लिन: रूस के बढ़ते खतरे के बीच जर्मनी अपनी सेना को फिर से यूरोप की सबसे शक्तिशाली बनाने की राह पर है। जर्मनी में अब 18 वर्ष से अधिक आयु के युवाओं के लिए आर्मी में शामिल होना नई सरकारी योजना के तहत वॉलंटरी रूप से अनिवार्य कर दिया गया है। यह योजना जर्मनी को द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार यूरोप की सबसे मजबूत पारंपरिक सेना बनाने में मदद करेगी।

 

पिछले साल जर्मनी की सक्रिय सैन्य शक्ति 1,84,000 थी, जो हाल ही में बढ़कर 1,86,500 हो गई है। चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने संसद में स्पष्ट किया कि बुंडेसवेहर को “यूरोप की सबसे मजबूत पारंपरिक सेना” बनने की आवश्यकता है।

 

पॉट्सडैम स्थित बुंडेसवेहर सेंटर ऑफ मिलिट्री हिस्ट्री एंड सोशल साइंसेज के सीनियर रिसर्चर टिमो ग्राफ ने कहा, “यह लंबे समय में हमारी सबसे बड़ी सैन्य शक्ति है और 2021 के बाद हमारी सबसे मजबूत सेना।”

 

जर्मनी की नई 23 महीने की वॉलंटरी सेवा योजना भारत के ‘अग्निवीर’ मॉडल से मिलती-जुलती है। जर्मनी में इसके लिए 2,600 यूरो (करीब 3,000 डॉलर) मासिक वेतन दिया जाएगा, साथ ही आवास और मेडिकल इंश्योरेंस मुफ्त है।

 

सरकार ने NATO से वादा किया है कि 2035 तक सक्रिय सैन्य बल 2,60,000 और रिजर्व सैनिकों की संख्या 2,00,000 तक बढ़ाई जाएगी। यह संख्या शीत युद्ध के समय के स्तर के बराबर होगी।

 

जर्मनी की इस बढ़ती सैन्य तैयारी से मॉस्को भी चिंतित है। रूस के राजदूत सर्गेई नेचायेव ने हाल ही में बताया, “जर्मनी रूस के साथ बड़े पैमाने पर सैन्य टकराव की तैयारी तेज कर रहा है।”

 

इस कदम के पीछे जर्मन जनता का अमेरिका से भरोसा टूटना भी मुख्य वजह है। जून 2025 में ZDF द्वारा कराए गए सर्वे में 73% जर्मनों ने कहा कि अमेरिका यूरोप की सुरक्षा की गारंटी नहीं देगा, जो दिसंबर में बढ़कर 84% हो गई। अब 10 में से नौ जर्मन अमेरिका के राजनीतिक प्रभाव को नुकसानदायक मानते हैं।

 

जर्मनी का डिफेंस बजट भी ऐतिहासिक रूप से बढ़ा है। 2021 में 56 अरब डॉलर का बजट 2025 में बढ़कर 125 अरब डॉलर हो गया, जो देश के GDP का 2.5% है। सरकार की योजना है कि 2030 तक यह आंकड़ा 3.5% तक पहुँच जाएगा।

 

 

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