
तेल अवीव/वॉशिंगटन: अमेरिकी सूत्रों ने खुलासा किया है कि इजरायल ने अमेरिका को ईरान पर संभावित सैन्य हमले से रोक दिया। अमेरिकी प्रशासन ने इजरायल के इस तर्क को मान्यता देते हुए हमला स्थगित कर दिया।
इजरायल ने अमेरिका को स्पष्ट किया कि कोई भी सीमित सैन्य कार्रवाई ईरान में शासन परिवर्तन सुनिश्चित नहीं कर पाएगी। इजरायली अधिकारियों के अनुसार, अगर ईरान दुर्लभ परिस्थितियों में भी 700 मिसाइलों तक हमला करता है, तो जून में हुए 500 बैलिस्टिक मिसाइल हमले के समय जितना नुकसान हुआ था, लगभग वही नुकसान इस बार भी हो सकता है।
इजरायल का मानना था कि अमेरिकी हमला ईरान की सरकार को गिराने में असफल रहेगा, जबकि इसके कारण इजरायल को गंभीर नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसी वजह से उसने ट्रंप प्रशासन को चेतावनी दी कि हमला करना जोखिम भरा हो सकता है और लंबे संघर्ष की स्थिति पैदा कर सकता है।
अमेरिका की नई रणनीति और बढ़ती तैयारी
हालांकि, ईरान पर खतरा पूरी तरह टला नहीं है। अमेरिका अब राजनयिक और सैन्य दबाव के नए तरीकों पर काम कर रहा है। फारस की खाड़ी में दो एयरक्राफ्ट कैरियर्स — अब्राहम लिंकन और फोर्ड — तैनात किए जा चुके हैं। हिंद महासागर में डिएगो गार्सिया आईलैंड पर कार्गो विमानों की तैनाती शुरू हो गई है। खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों पर एयर डिफेंस सिस्टम को भी मजबूत किया जा रहा है।
सैन्य और खुफिया एजेंसियां ईरान की आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक और जातीय कमजोरियों पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं, ताकि किसी भी सैन्य कार्रवाई में सरकार के अस्थिर होने का खतरा बढ़ सके।
इजरायल की तैयारी भी उच्च स्तर पर
इजरायल डिफेंस फोर्स (IDF) ने भी अपने ऑपरेशनल तैयारियों को हाई अलर्ट पर रखा है। नेगेव स्थित नेवातिम एयरबेस पर रविवार को तीन नए F-35 एडिर फाइटर जेट उतारे गए, जिससे इजरायली वायु सेना में जेट्स की संख्या 48 हो गई। IDF नए जेट्स को पूरी तरह से ऑपरेशनल बनाने के लिए तेजी से ट्रेनिंग और सिस्टम इंटीग्रेशन कर रहा है।
इजरायल और अमेरिका दोनों की तैयारी और रणनीति यह दर्शाती है कि ईरान को लेकर तनाव अभी भी उच्च स्तर पर है और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए कोई भी कदम बेहद संवेदनशील माना जा रहा है।