
नई दिल्ली: प्रदूषण कम करने की दिशा में राजधानी दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को तेजी से अपनाया जा रहा है, लेकिन चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी इस रफ्तार में बड़ा रोड़ा बन रही है। दिल्ली सरकार ने ‘कमीशन फॉर एयर क्वॉलिटी मैनेजमेंट’ (CAQM) को सौंपे गए अपने ताजातरीन स्टेट एक्शन प्लान में यह स्वीकार किया है कि 2026 के अंत तक चार्जिंग पॉइंट्स की संख्या दोगुनी करने के बावजूद यह वास्तविक मांग के मुकाबले काफी कम रहेंगे।
राजधानी में चार्जिंग पॉइंट्स की बड़ी कमी
प्लान के मुताबिक, 31 दिसंबर 2025 तक दिल्ली में केवल 8,008 चार्जिंग पॉइंट्स उपलब्ध थे, जबकि शहर की मौजूदा जरूरत 36,177 पॉइंट्स की है। इसका मतलब है कि डिमांड और सप्लाई में 27,373 पॉइंट्स का बड़ा गैप है। प्रशासन का लक्ष्य है कि 31 दिसंबर 2026 तक यह संख्या बढ़ाकर 16,070 कर दी जाए, जिसके लिए इस साल लगभग 7,000 नए चार्जिंग पॉइंट्स लगाने की योजना बनाई गई है।
चार्जिंग पॉइंट लगाने में चुनौतियां
ईवी चार्जिंग पॉइंट्स सोसायटी, मॉल, डीएमआरसी और होटलों की पार्किंग में लगाए जा रहे हैं। कई जगहों पर फुटपाथ और खुले स्थानों पर भी चार्जिंग स्टेशन लगाए गए, लेकिन इनमें से कई चोरी हो चुके हैं। इसी वजह से अब सभी एजेंसियां और चार्जिंग कंपनियां इन्हें खुले में लगाने से हिचकती हैं। वहीं, सोसायटी और अन्य प्राइवेट स्थानों पर लगे चार्जिंग पॉइंट का उपयोग अपेक्षाकृत कम हो रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि चार्जिंग नेटवर्क में सुधार और सुरक्षा उपाय समय पर नहीं किए गए, तो दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों की तेजी को बनाए रखना मुश्किल होगा।
