Monday, January 19

रूस और आतंकवाद पर भारत का सख़्त संदेश, पोलैंड को दी दो-टूक नसीहत

 

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नई दिल्ली। रूस के साथ व्यापारिक संबंधों और सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे पर भारत ने पोलैंड के सामने अपना रुख बेहद स्पष्ट और कड़े शब्दों में रखा है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने साफ कहा कि भारत को निशाना बनाने की कोई भी भेदभावपूर्ण या अनुचित कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साथ ही उन्होंने चेताया कि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के मामले में पोलैंड प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी तरह का समर्थन न करे।

 

यह बातें नई दिल्ली में पोलैंड के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री राडोस्लाव सिकोर्स्की के साथ हुई उच्चस्तरीय वार्ता के दौरान सामने आईं। बैठक में दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा के साथ-साथ समकालीन वैश्विक मुद्दों पर भी गहन चर्चा हुई।

 

भारत को चुनिंदा तरीके से निशाना न बनाया जाए

रूस-यूक्रेन युद्ध और बदलती वैश्विक भू-राजनीति पर बातचीत करते हुए जयशंकर ने कहा कि उन्होंने न्यूयॉर्क और पेरिस में भी यह मुद्दा उठाया था और अब दिल्ली में इसे दोहरा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि रूस के साथ व्यापार करने को लेकर भारत पर टैरिफ और अन्य दबाव बनाना अनुचित है। भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति से समझौता नहीं करेगा और वह हमेशा संवाद व कूटनीति के जरिए संघर्ष समाप्त करने का पक्षधर रहा है।

 

आतंकवाद पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की मांग

बैठक में आतंकवाद दूसरा सबसे अहम मुद्दा रहा। जयशंकर ने पोलैंड के मंत्री को याद दिलाया कि यूरोप भी इस खतरे की गंभीरता से परिचित है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जानी चाहिए और भारत के पड़ोस में आतंकी ढांचे को बढ़ावा देने वाली किसी भी गतिविधि का समर्थन नहीं होना चाहिए। यह टिप्पणी सीधे तौर पर पाकिस्तान के संदर्भ में देखी जा रही है और इसे अक्टूबर 2025 में इस्लामाबाद यात्रा के दौरान कश्मीर पर पोलैंड की टिप्पणी के जवाब के रूप में भी माना जा रहा है।

 

पोलैंड ने जताई सहमति

पोलैंड के विदेश मंत्री राडोस्लाव सिकोर्स्की ने भारत की चिंताओं से सहमति जताई। उन्होंने माना कि टैरिफ के जरिए किसी देश को निशाना बनाना गलत है और इससे वैश्विक व्यापार व्यवस्था को नुकसान पहुंच सकता है। आतंकवाद पर उन्होंने कहा कि पोलैंड स्वयं भी आगजनी और राज्य प्रायोजित हमलों का शिकार रहा है, इसलिए वह इस खतरे से निपटने की आवश्यकता को भली-भांति समझता है।

 

यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत-पोलैंड संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 7 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। हालांकि, भारत ने इस मौके पर अपनी कूटनीतिक सीमाएं स्पष्ट करते हुए यह संदेश भी दे दिया कि राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

 

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