
बीजिंग: अमेरिका और चीन के बीच वायु शक्ति की दौड़ बढ़ती जा रही है। अमेरिकी एफ-35 स्टील्थ फाइटर जेट के जवाब में चीन J-20 और J-35A स्टील्थ फाइटर जेट का बड़े पैमाने पर उत्पादन कर रहा है। ब्रिटिश थिंक टैंक RUSI की ताजा रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि साल 2030 तक चीन और रूस की हवाई ताकत अमेरिकी वायु श्रेष्ठता के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।
चीन की बढ़ती वायु शक्ति
रिपोर्ट के अनुसार, साल 2020 में चीन के पास केवल 90–100 हैवी फाइटर जेट थे। 2025 तक यह संख्या बढ़कर 450 हो गई। J-16 फाइटर जेट का उत्पादन दोगुना होकर 80–100 तक पहुंच गया। साल 2030 तक चीन के पास 900 J-16 और 800 J-10C फाइटर जेट तैनात हो सकते हैं। J-10C वायुसेना के AESA रडार और आधुनिक सेंसर से लैस है और यह भारत के राफेल जेट से मुकाबला कर सकता है।
J-20 और J-35A स्टील्थ फाइटर
चीन की J-20 स्टील्थ फाइटर जेट बनाने की क्षमता भी तेजी से बढ़ रही है। साल 2020 में चीन 40–50 J-20 जेट बना सकता था, जो अब बढ़कर 120 हो गई है। साल 2030 तक चीन 1000 J-20 स्टील्थ फाइटर जेट तैनात कर सकता है। इसके अलावा चीन का नया J-35A स्टील्थ फाइटर जेट भी सीरियल प्रोडक्शन में आ गया है, जिसे 2030 तक बड़े पैमाने पर तैयार किया जा सकता है।
अमेरिका की स्थिति
साल 2025 में अमेरिका की लॉकहीड मार्टिन कंपनी ने 19 देशों के लिए 191 F-35 फाइटर जेट बनाए। हालांकि चीन की रफ्तार और उत्पादन क्षमता बढ़ते हुए अमेरिका के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति उत्पन्न कर सकती है।
वैश्विक असर
RUSI की रिपोर्ट में चेताया गया है कि चीन की बढ़ती वायु ताकत हिंद–प्रशांत क्षेत्र में अमेरिकी वायु श्रेष्ठता को चुनौती दे सकती है। साथ ही रूस की हवाई ताकत यूरोप में संतुलन बदल सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि 2030 तक अमेरिका के एफ-22 और एफ-35 जेट दुश्मन हवाई क्षेत्र में घुसने में मुश्किलों का सामना करेंगे।