Monday, January 19

ओवैसी का चेहरा और बीजेपी जैसा ‘पैटर्न’ – AIMIM अब सिर्फ हैदराबाद की पार्टी नहीं

 

This slideshow requires JavaScript.

 

 

नई दिल्ली: भारत में मुस्लिम मतदाताओं का झुकाव कांग्रेस के बाद अगर किसी एक पार्टी की ओर सबसे अधिक है, तो वह है असदुद्दीन ओवैसी की मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM)। पिछले दशक में जैसे-जैसे बीजेपी का विस्तार तेजी से हुआ है, वैसे-वैसे ओवैसी का राजनीतिक कद भी बढ़ता गया है। अब AIMIM सिर्फ हैदराबाद तक सीमित नहीं रही, बल्कि देश के बड़े हिस्सों में अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही है।

 

विशेष बात यह है कि AIMIM का विस्तार बीजेपी के मॉडल की तरह हो रहा है – यानी एक चेहरे के दम पर पार्टी को राष्ट्रीय पहचान दिलाना। इस चेहरे में वह हैदराबाद के सांसद और AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी हैं, जिन्हें देश भर में मुसलमानों का भरोसेमंद नेता माना जाने लगा है।

 

 

 

AIMIM का तेजी से बढ़ता जनाधार

 

हाल ही में हुए महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव में AIMIM ने अपनी ताकत का सबूत दिया। पार्टी ने 13 नगर निगमों में कुल 126 पार्षदों की जीत दर्ज की। इससे साफ हो गया कि AIMIM का जनाधार केवल हैदराबाद तक सीमित नहीं रहा। 2014 के बाद बीजेपी की तरह AIMIM भी अपने विस्तार के नए दौर में है, और ओवैसी का एक-के-बाद-एक पूरे देश में राजनीतिक असर बढ़ रहा है।

 

 

 

ओवैसी – AIMIM का सबसे बड़ा चेहरा

 

AIMIM में ओवैसी अकेले ऐसा चेहरा हैं, जिन्हें हैदराबाद की ओल्ड सिटी से लेकर पूरे देश में पहचान और सम्मान मिला है। उनके समर्थक युवा मुसलमान ही नहीं, बल्कि उनके आलोचक भी उन्हें उनके भाई अकबरुद्दीन ओवैसी से अलग मानते हैं। राष्ट्रीय मसलों पर ओवैसी विदेश भी जाते हैं, और मुसलमानों के मुद्दों पर वह देश के भीतर भी विशेष महत्व रखते हैं।

 

 

 

हैदराबाद से बाहर – राष्ट्रीय विस्तार

 

एआईएमआईएम का मूल केंद्र हैदराबाद में है, लेकिन अब यह तेलंगाना और अन्य राज्यों में भी पैर पसार रही है।

 

तेलंगाना: 7 विधायक, 2 MLC, 67 निगम पार्षद

बिहार विधानसभा: लगातार 2 बार 5 सीटें

महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव: कांग्रेस और एनसीपी को पीछे छोड़कर 126 पार्षद

 

दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में AIMIM ने कोई सीट नहीं जीती, लेकिन मुस्तफाबाद सीट पर 33,474 वोट मिलने से बीजेपी-विरोधी दलों के लिए खतरा बढ़ गया। इस तरह AIMIM मुस्लिम वोट बैंक में कांग्रेस के बाद सबसे बड़ी ताकत बन गई है।

 

 

 

कांग्रेस के बाद सबसे बड़ा मुस्लिम चेहरा

 

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 में भी AIMIM ने चुनिंदा सीटों पर जीत दर्ज नहीं की, लेकिन बीजेपी-विरोधी दलों की धड़कनें बढ़ा दी। कई सीटों पर AIMIM के वोट बीजेपी की जीत के मार्जिन से ज्यादा थे। इस पूरे राष्ट्रीय विस्तार के पीछे असदुद्दीन ओवैसी का चेहरा और उनके नेतृत्व की रणनीति प्रमुख कारण हैं।

 

निष्कर्ष: कांग्रेस के बाद भारत में मुस्लिम मतदाताओं की सबसे बड़ी राजनीतिक उम्मीद अब असदुद्दीन ओवैसी और AIMIM ही बन चुके हैं। देश भर में पार्टी का प्रभाव बढ़ता जा रहा है, और यह अब केवल हैदराबाद की पार्टी नहीं रही।

 

 

Leave a Reply