Monday, January 19

बिहार: नालंदा में 8 नीलगायों का शूटरों ने किया सफाया, किसानों को मिली राहत

 

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नालंदा: बिहार के नालंदा जिले में वन विभाग की ओर से तैनात शूटरों ने आठ नीलगायों को मार गिराया। यह कदम किसानों की फसलों को लगातार हो रहे नुकसान को देखते हुए उठाया गया। जिले के किसानों ने वर्षों से अपने खेतों की रखवाली की, लेकिन नीलगायों के झुंड फसलों को पल भर में बर्बाद कर देते थे।

नीलगायों की बढ़ती संख्या से किसानों पर संकट
सोनसा पंचायत और आसपास के क्षेत्रों में नीलगायों की संख्या तेजी से बढ़ी है। रात के समय झुंड बनाकर खेतों में प्रवेश करने वाली ये नीलगायें गेहूं, मसूर, धनिया और सरसों जैसी तैयार फसलों को चर डालती हैं। भारी शरीर के कारण ये फसलों को रौंद भी देती हैं। पिछले कुछ महीनों में जिले की कई पंचायतों में लगभग 700 एकड़ फसल नीलगायों के कारण बर्बाद हो चुकी है, जिससे किसानों को लाखों रुपये का नुकसान हुआ।

प्रशासन ने किया विशेष अभियान
किसानों की लगातार शिकायतों के बाद जिला प्रशासन ने कार्रवाई की। सोनसा पंचायत के टाल क्षेत्र में विशेष अभियान चलाकर वन विभाग ने तीन प्रशिक्षित शूटरों को तैनात किया। कई घंटों तक चले ऑपरेशन में आठ नीलगायों को मार गिराया गया। वन विभाग का कहना है कि इससे फिलहाल क्षेत्र में नीलगायों का आतंक कुछ हद तक कम हुआ है, हालांकि यह राहत अस्थायी है।

संरक्षित प्राणी पर विवाद
नीलगाय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची III के तहत संरक्षित प्राणी है। सामान्य परिस्थितियों में इसे मारना अपराध है। हालांकि फसलों को भारी नुकसान पहुंचाने के कारण बिहार, उत्तर प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्यों में इसे ‘उपद्रवी’ घोषित कर मारने की अनुमति दी गई है। इस कार्रवाई में सरकार द्वारा अधिकृत शूटरों और तय प्रोटोकॉल का पालन किया गया।

राज्य सरकारों की नीति
बिहार सरकार ने नीलगायों और जंगली सूअरों से फसलों को हो रहे नुकसान को देखते हुए विशेष अनुमति दी है। हरियाणा में भी नर नीलगायों को मारने के लिए वन्यजीव संरक्षण नियम, 2024 के तहत मंजूरी दी गई है। अन्य राज्यों जैसे राजस्थान और मध्य प्रदेश में भी आबादी नियंत्रण के विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।

किसानों की उम्मीद
किसानों का कहना है कि शूटरों की कार्रवाई से फिलहाल राहत मिली है, लेकिन नीलगायों की बढ़ती आबादी पर स्थायी नियंत्रण तक यह समस्या बार-बार सामने आती रहेगी।

 

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