
विदेश में पढ़ाई करने का सपना कई भारतीय छात्रों का होता है। लेकिन सही समय और सही कोर्स का चुनाव न करने पर पढ़ाई के बाद भी नौकरी नहीं मिलने की समस्या सामने आ सकती है। इस बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर एक अनुभवी भारतीय वर्कर ने साफ तौर पर बताया कि किसे विदेश में पढ़ाई करनी चाहिए और कौन से कोर्स अब पुरानी डिमांड के कारण कम उपयोगी हैं।
इस भारतीय वर्कर का अनुभव अमेरिका, ब्रिटेन, नीदरलैंड और न्यूजीलैंड में काम करने का है। उन्होंने कहा कि विदेश में पढ़ाई का फैसला लेने से पहले छात्र को पूरी तरह जानकारी होनी चाहिए, वरना जॉब मिलने में मुश्किल हो सकती है।
MBA और कंप्यूटर साइंस का दौर:
वर्कर ने कहा कि पहले भारतीय छात्रों के बीच MBA और IT/कंप्यूटर साइंस के कोर्स बहुत लोकप्रिय थे। मगर अब MBA की डिग्री वाली नौकरियों की डिमांड घट गई है। वहीं, कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई अभी भी लोकप्रिय है, लेकिन AI और ऑटोमेशन की वजह से जॉब मार्केट धीमा पड़ रहा है। पहले किसी भी अच्छे कॉलेज से कंप्यूटर साइंस की डिग्री लेने पर जॉब मिल जाती थी, अब ऐसा नहीं है।
विदेश पढ़ने का सही समय:
वर्कर ने स्पष्ट किया कि विदेश सिर्फ उन्हीं छात्रों को जाना चाहिए, जिन्होंने भारत की किसी टॉप यूनिवर्सिटी (जैसे IIT या NIT) से अच्छी पढ़ाई की हो। साथ ही, विदेश की टॉप यूनिवर्सिटी में एडमिशन पाने की संभावना होनी चाहिए। किसी कम प्रतिष्ठित या दूरदराज के कॉलेज में पढ़ाई करना करियर के लिए फायदेमंद नहीं रहेगा।
कौन से कोर्स फायदेमंद हैं:
उन्होंने बताया कि मेडिकल फील्ड, खासकर नर्सिंग, अभी भी विदेश में अच्छा विकल्प है। इसके अलावा दो स्किल वाले कोर्स जैसे केमिकल इंजीनियरिंग के साथ टेक्नोलॉजी या मैनेजमेंट भी फायदेमंद हैं। वहीं, ह्यूमैनिटीज और केवल साइंस/मैथ्स/अर्थशास्त्र वाले कोर्स का फायदा विदेश में कम है।
वर्कर का साफ संदेश है: विदेश की पढ़ाई तभी सोचें जब आपका बैकग्राउंड मजबूत हो, अच्छे कॉलेज से डिग्री हो और एडमिशन टॉप यूनिवर्सिटी में मिलने की संभावना हो। अन्यथा, विदेश जाने के खर्च और मेहनत का लाभ मिलना मुश्किल है।