
मुंबई: मुंबई नगर निगम (BMC) चुनाव 2026 में बीजेपी और उसके सहयोगियों की बड़ी जीत उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के लिए राजनीतिक झटका साबित हुई है। क्षेत्रवाद पर आधारित राजनीति का जो असर ठाकरे भाइयों ने अपने गढ़ में दिखाने की कोशिश की थी, उसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा।
देश के कुछ राज्यों से भी बड़े बजट वाले BMC पर ठाकरे परिवार का लंबे समय तक प्रभुत्व रहा, लेकिन इस चुनाव में बीजेपी की अगुवाई वाले महायुति गठबंधन ने उन्हें उनके ही गढ़ में हरा दिया। इस जीत को विश्लेषक ठाकरे परिवार के राजनीतिक भविष्य पर बड़ा असर डालने वाला बता रहे हैं।
ठाकरे भाइयों की बड़ी हार
227 सीटों के लिए हुए मतदान में सर्वेक्षण और प्रारंभिक आंकड़ों से पता चला कि उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) और राज ठाकरे की एमएनएस को मुख्य रूप से मराठी और मुस्लिम वोट मिले, जबकि उत्तर भारतीय और दक्षिण भारतीय वोटरों ने बीजेपी के पक्ष में मतदान किया। एक्सिस माय इंडिया के सर्वे के अनुसार, मराठी वोटरों में शिवसेना को 49% और बीजेपी गठबंधन को 30% वोट मिले, जबकि मुस्लिम वोटरों में कांग्रेस गठबंधन आगे रहा।
दक्षिण और उत्तर भारतीय वोटरों ने बीजेपी को बढ़त दी
उत्तर भारतीय और दक्षिण भारतीय मतदाताओं ने बीजेपी गठबंधन को भारी समर्थन दिया। बीजेपी को 68% उत्तर भारतीय और 61% दक्षिण भारतीय वोट मिले, जबकि शिवसेना को क्रमशः केवल 19% और 21% वोट मिले। राज ठाकरे के पुराने नफरती बयानों और दक्षिण भारतीय विरोध ने ठाकरे परिवार की स्थिति को कमजोर किया।
‘पुंगी’ और ‘रसमलाई’ का राजनीतिक असर
उद्धव ठाकरे के पिता बाल ठाकरे ने मुंबई में मराठी मतदाताओं को केंद्रित करने के लिए शिवसेना की स्थापना की थी। उनका नारा ‘उठाओ लुंगी, बचाओ पुंगी’ आज भी ठाकरे परिवार की राजनीति में असर दिखाता है। इस चुनाव में दक्षिण भारतीय वोटरों ने बीजेपी के पक्ष में मतदान कर ठाकरे भाइयों की रणनीति को कमजोर किया।
बीएमसी चुनाव में दक्षिण भारतीय मतदाताओं तक संदेश पहुंचाने के लिए बीजेपी ने चेन्नई से लोकप्रिय नेता और पूर्व आईपीएस अन्नामलाई को प्रचार के लिए उतारा। उन्होंने सायन और धारावी जैसे दक्षिण भारतीय आबादी वाले क्षेत्रों में बीजेपी के लिए प्रचार किया, जिससे गठबंधन को बड़ी सफलता मिली।
ठाकरे भाइयों की राजनीति रही फेल
चुनाव प्रचार के दौरान अन्नामलाई के बयान और उनका दावा कि ‘बॉम्बे एक अंतरराष्ट्रीय शहर है’ पर राज ठाकरे ने तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा, “तमिलनाडु से एक रसमलाई आया है। इस स्थान से आपका क्या कनेक्शन है? हटाओ लुंगी, बजाओ पुंगी।” बाद में शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में भी उन्हें ‘भिखारी’ कहा गया।
बीजेपी की आगे की रणनीति
मुंबई के जनादेश के बाद बीजेपी दक्षिण के दो राज्यों, तमिलनाडु और केरल में आगामी विधानसभा चुनाव में अपनी पकड़ मजबूत करने की तैयारी में है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तमिलनाडु में सरकार बनाने का दावा किया है। केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में भी बीजेपी के मेयर पद पर जीत का लक्ष्य है।