
नई दिल्ली: चाबहार बंदरगाह परियोजना को लेकर कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भारत अमेरिकी दबाव के आगे झुकते हुए चाबहार पोर्ट से चुपचाप कदम पीछे खींच रहा है। हालांकि, सरकार की तरफ से इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
कांग्रेस के मीडिया सेल के चेयरमैन पवन खेड़ा ने कहा, “चाबहार कोई आम बंदरगाह नहीं है। यह भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशिया से एक अहम, सीधा समुद्री मार्ग देता है, जिससे पाकिस्तान को बाईपास किया जा सकता है और चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का मुकाबला किया जा सकता है।”
उन्होंने आगे सवाल उठाया कि अब यह सुनकर कि भारत ने अमेरिकी दबाव में चाबहार से पीछे हटने का निर्णय लिया, यह सरकार की विदेश नीति में एक नई गिरावट है। पवन खेड़ा ने कहा, “सवाल चाबहार पोर्ट या रूसी तेल का नहीं है, सवाल यह है कि मोदी अमेरिका को भारत पर दबाव बनाने की अनुमति क्यों दे रहे हैं?”
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ईटी इंफ्रा ने बताया कि ईरान के चाबहार पोर्ट को डेवलप करने में भारत की लगभग दस साल पुरानी भागीदारी अब खतरे में है। रिपोर्ट में कहा गया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 12 जनवरी को घोषणा की थी कि फारस की खाड़ी के इस देश के साथ व्यापार करने वाले किसी भी देश को अमेरिका के अन्य व्यापारिक सौदों पर 25 प्रतिशत टैरिफ का सामना करना पड़ सकता है।
इससे पहले अमेरिका ने 29 सितंबर, 2025 से चाबहार पोर्ट पर फिर से प्रतिबंध लगा दिया था, जिससे भारत की रणनीतिक स्थिति कमजोर हुई। इस मामले पर भारत सरकार की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।