
अमेरिका ने मिडिल ईस्ट की तरफ एयरक्राफ्ट कैरियर अब्राहम लिंकन स्ट्राइक ग्रुप (ABECSG) भेजा है, जिसमें लगभग 90 लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर शामिल हैं। इसमें आधुनिक F-35C लाइटनिंग II और F/A-18E/F सुपर हॉर्नेट जैसे विमानों के साथ-साथ आर्ले बर्क-क्लास गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर तैनात हैं। अमेरिकी नौसेना के अनुसार, इस कैरियर में टॉमहॉक मिसाइलें भी हैं, जिनकी मारक क्षमता 1,600 से 2,500 किलोमीटर के बीच है, जिससे यह ईरान की सीमा में घुसे बिना देश के कई हिस्सों में हमला कर सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अब्राहम लिंकन स्ट्राइक ग्रुप परमाणु ऊर्जा से संचालित सबसे शक्तिशाली समुद्री यूनिट है और इसे चलता-फिरता युद्धक मैदान माना जाता है। जनवरी के पहले हफ्ते तक यह कैरियर दक्षिण चीन सागर और फिलीपीन सागर में ऑपरेट कर रहा था, लेकिन पेंटागन ने इसे बढ़ते ईरान तनाव के बीच मध्य पूर्व की तरफ बढ़ने का आदेश दिया।
अमेरिका के कदम और राजनीतिक संकेत
पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान में प्रदर्शनकारियों का समर्थन करने का ऐलान किया था। इसके अलावा, रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने ईरान के निर्वासित नेता रेजा पहलवी से मुलाकात की। इन घटनाओं के बीच अब्राहम लिंकन का मिडिल ईस्ट की तरफ बढ़ना सुरक्षा विशेषज्ञों में चिंता का कारण बना है।
अब्राहम लिंकन स्ट्राइक ग्रुप की ताकत
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस कैरियर स्ट्राइक ग्रुप की क्षमताएँ बेहद खतरनाक हैं:
90 लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर तैनात
F-35 और F/A-18E/F जैसे अत्याधुनिक जेट
जटिल हथियार प्रणाली और स्टील्थ तकनीक
टॉमहॉक मिसाइलों के जरिए लंबी दूरी तक हमला
इसके अलावा, अगर ईरान किसी पड़ोसी देश या इजरायल पर मिसाइल हमला करता है, तो यह एयरक्राफ्ट कैरियर उन मिसाइलों को इंटरसेप्ट करने में सक्षम है।
क्षेत्रीय स्थिति तनावपूर्ण
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने कतर के अल उदीद एयर बेस से अपने कर्मचारियों को वापस बुला लिया है। ईरान ने अपने एयरस्पेस को अचानक बंद कर दिया है और दोनों तरफ से कड़ी चेतावनियां जारी की जा रही हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी समय ईरान पर अमेरिकी हमला शुरू हो सकता है।
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि अब्राहम लिंकन स्ट्राइक ग्रुप की यह तैनाती मिडिल ईस्ट में शक्ति का स्पष्ट संदेश है और क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकती है।
